जगरांव (चरणजीत सिंह चन्न) : पंजाब के जागरांव से इंसानियत को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। स्थानीय थाने के तत्कालीन कथित थाना प्रमुख गुरिंदर बल्ल और बस अड्डा चौकी इंचार्ज एएसआई राजवीर द्वारा बनाए गए तथाकथित "टॉर्चर सेंटर" का जिन्न अब बोतल से बाहर आ गया है।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी), दिल्ली द्वारा भेजी गई विशेष जांच टीम ने 22 साल पुराने इस खौफनाक मामले की जमीनी पड़ताल के लिए क्षेत्र का दौरा किया है।
सूत्रों के अनुसार, जांच टीम ने विवादित टॉर्चर सेंटर के साथ जागरांव सिटी थाने के पुराने कमरों और हवालात की बारीकी से जांच की। इसके बाद टीम सीधे उस धरने स्थल पर पहुंची, जहां पीड़ित परिवार पिछले चार साल से लगातार न्याय की गुहार लगा रहा है। टीम ने वर्तमान थाना प्रभारी इंस्पेक्टर परमिंदर सिंह से भी मामले की फीडबैक ली और करीब दो दर्जन से अधिक गवाहों व पीड़ितों के बयान दर्ज करने के बाद दिल्ली के लिए रवाना हो गई।
क्या है पूरा मामला? मुकदमे के मुख्य मुद्दई इकबाल सिंह रसूलपुर ने जांच अधिकारियों को बताया कि तत्कालीन थाना प्रमुख गुरिंदर सिंह बल्ल और एएसआई राजवीर ने जातिगत दुर्भावना के चलते उनके परिवारों को अवैध हिरासत में रखा था। आरोप है कि कुलवंत कौर को बेरहमी से करंट लगाया गया और मनप्रीत कौर को गंभीर शारीरिक व मानसिक प्रताड़ना दी गई। तमाम दस्तावेजी सबूतों के बावजूद आरोपियों पर कार्रवाई न होने से खफा पीड़ित परिवार पिछले चार साल से थाने के बाहर धरने पर बैठा है।
दशमेश किसान मजदूर यूनियन, दिहाती मजदूर सभा और मानवाधिकार संगठनों ने एनएचआरसी की इस जांच का स्वागत किया है।
किसान-मजदूर नेताओं ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि आरोपी पुलिसकर्मियों को जल्द गिरफ्तार कर कड़ी सजा नहीं दी गई, तो संघर्ष को और तेज किया जाएगा।