विष्णुगाड-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना की टीआरटी टनल में भू-धंसाव के बाद करीब 1.50 किलोमीटर हिस्से में पानी और मलबा भर गया। हादसे के बाद 22 लोगों के फंसे होने की सूचना थी। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, आईटीबीपी और पुलिस की टीमें लगातार अभियान चला रही हैं। खराब मौसम के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पीपलकोटी पहुंचे और मौके पर राहत-बचाव कार्यों का निरीक्षण करेंगे।

देहरादून (Naren Danu) : उत्तराखंड के चमोली जिले में पीपलकोटी के मायापुर क्षेत्र में निर्माणाधीन टीएचडीसी सुरंग हादसा लगातार गंभीर होता जा रहा है। मलबे और पानी से भरी सुरंग में अब तक सात श्रमिकों की मौत की पुष्टि हुई है। अंदर फंसे अन्य लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, आईटीबीपी और पुलिस समेत कई एजेंसियां लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं।

हादसे के बाद शुक्रवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी बेहद खराब मौसम के बीच पीपलकोटी पहुंचे। कठिन मौसम के बावजूद उनका हेलीकॉप्टर वहां उतरा। मुख्यमंत्री घटनास्थल का जायजा लेकर बचाव अभियान की स्थिति की समीक्षा करेंगे। उन्होंने कहा कि सुरंग में फंसे प्रत्येक श्रमिक को सुरक्षित बाहर निकालना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और सभी एजेंसियां पूरी ताकत के साथ अभियान में जुटी हैं।

डेढ़ किलोमीटर हिस्से में भरा मलबा-पानी

जिला प्रशासन के अनुसार विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की टीआरटी सुरंग में गुरुवार शाम भू-धंसाव के बाद करीब डेढ़ किलोमीटर हिस्से में पानी और मलबा भर गया। सुरंग की कुल लंबाई लगभग तीन किलोमीटर बताई गई है। हादसे के समय करीब 22 लोगों के सुरंग में फंसे होने की सूचना मिली थी।

जिलाधिकारी गौरव कुमार रातभर घटनास्थल पर मौजूद रहे और रेस्क्यू ऑपरेशन की निगरानी करते रहे। सुरंग के भीतर राहत कार्य के लिए गए छह बचावकर्मी सुरक्षित हैं। हालांकि, पानी और भारी मलबे के कारण बचाव दल के सामने लगातार मुश्किलें बनी हुई हैं।

घायलों को जिला चिकित्सालय गोपेश्वर में भर्ती कराया गया है। एक घायल को बेहतर उपचार के लिए श्रीनगर रेफर किया गया है, जबकि एक कर्मचारी को उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दिए जाने की जानकारी सामने आई है।

सात मृतकों की हुई पहचान

हादसे में जान गंवाने वालों में प्रदीप सिंह पवार, मुकेश, दुर्लभ शर्मा, विजय, जितेंद्र कुमार, लोकेश्वर और भुनेश्वर शामिल हैं। प्रदीप सिंह पवार टिहरी के चंबा क्षेत्र के ग्राम गेंवाल के निवासी थे। मुकेश चमोली के उर्गम क्षेत्र से बताए गए हैं। दुर्लभ शर्मा बिहार, जबकि विजय और जितेंद्र कुमार झारखंड के निवासी थे। लोकेश्वर और भुनेश्वर के संबंध में विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है।

अस्पताल में भर्ती घायलों में छत्तीसगढ़, झारखंड, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और बिहार के श्रमिक शामिल हैं। प्रशासन सभी घायलों की स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

कई एजेंसियां एक साथ जुटीं

सुरंग के भीतर राहत कार्य में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, आईटीबीपी, पुलिस और तकनीकी विशेषज्ञों की टीमें लगी हैं। भारी मशीनरी की मदद से मलबा हटाने और सुरंग के भीतर फंसे श्रमिकों तक पहुंच बनाने की कोशिश की जा रही है। प्रशासन ने बचाव दलों को उपलब्ध सभी संसाधनों और तकनीकी सहायता का इस्तेमाल करते हुए अभियान तेज करने के निर्देश दिए हैं।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि सरकार प्रभावित श्रमिकों और उनके परिवारों के साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने अधिकारियों को राहत, उपचार और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं में किसी भी तरह की कमी नहीं रहने देने के निर्देश दिए हैं।