‘मिशन जीवनी’ के तहत लुधियाना में चार महीने का गहन अभियान शुरू किया गया है। प्रशासन ने अस्पतालों को निर्देश दिए कि हाई-रिस्क गर्भवती महिलाओं का इलाज पर्याप्त सुविधाओं वाले केंद्रों में ही कराया जाए और जरूरत पड़ने पर तत्काल रेफर किया जाए। अभियान में जागरूकता, हाई-रिस्क मामलों की ट्रैकिंग, डिलीवरी व एम्बुलेंस प्रबंधन और ब्लड बैंक व्यवस्था को चार प्रमुख आधार बनाया गया है।

लुधियाना (अशोक सहगल) : ज़िला लुधियाना में मातृ मृत्यु दर को और कम करने और गर्भावस्था के दौरान होने वाली मौतों को पूरी तरह से रोकने के मकसद से आज 'मिशन जीवनी' (JEEVNI) के तहत चार महीने के एक विशेष गहन अभियान की शुरुआत की गई।

इस अवसर पर डिप्टी कमिश्नर हिमांशु जैन अपर डिप्टी कमिश्नर (ग्रामीण विकास) नरिंदर सिंह, सिविल सर्जन डॉ. हरिंदर सूद, डिप्टी मेडिकल कमिश्नर डॉ. वरुण सग्गर, डी.एफ.पी.ओ. डॉ. अमनप्रीत, डी.एम.सी.एच., सी.एम.सी., दीप अस्पताल और लुधियाना के अन्य निजी अस्पतालों व नर्सिंग होम के प्रतिनिधि, बड़ी संख्या में एम.पी.एच.डब्ल्यू और आशा वर्कर उपस्थित थे।

सभा को संबोधित करते हुए डिप्टी कमिश्नर ने जोर देकर कहा कि मिशन जीवनी का मुख्य उद्देश्य माताओं की कीमती जान बचाना है।

डिप्टी कमिश्नर ने निजी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों से विशेष रूप से निम्नलिखित बातों का ध्यान रखने की अपील की: हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी (HRP): उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं का इलाज ऐसे अस्पतालों में न किया जाए जहां जरूरी सुविधाएं उपलब्ध न हों। ऐसे मामलों को बिना किसी देरी के बड़े अस्पतालों में रेफर किया जाए।
गरीब मरीजों की मदद: निजी अस्पतालों से अनुरोध किया गया कि वे मिशन जीवनी में अपना योगदान देते हुए कम से कम एक जरूरतमंद (गरीब) मरीज का मुफ्त इलाज करें।
तुरंत देखभाल: गर्भवती महिला के अस्पताल पहुंचते ही उसकी तुरंत जांच और इलाज शुरू किया जाए, ताकि किसी भी तरह की देरी से बचा जा सके।
रक्त का प्रबंध: हाई-रिस्क मरीजों के लिए रक्त और रक्त घटकों (ब्लड कंपोनेंट्स) की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, ताकि खून की कमी के कारण किसी की जान न जाए।
सही समय पर रेफरल: यदि अस्पताल के पास आवश्यक सुविधाएं या विशेषज्ञ डॉक्टर न हों, तो हाई-रिस्क मामलों को तुरंत विशेषज्ञ अस्पतालों में भेजने में झिझक न की जाए।
डिप्टी कमिश्नर ने सभी प्रतिनिधियों से निजी अस्पतालों में होने वाली लापरवाही या गलत तरीकों पर नजर रखने के लिए भी कहा, जिससे गर्भवती महिलाओं की सुरक्षा को खतरा हो। ऐसी किसी भी बात को ज़िला प्रशासन के ध्यान में लाया जा सकता है ताकि नियमों के अनुसार उचित कार्रवाई की जा सके।
कार्यक्रम के दौरान मिशन जीवनी के 4 मुख्य बिंदुओं के बारे में बताया गया:
1. जागरूकता: गर्भवती महिलाओं, परिवारों, आशा वर्करों और समाज को हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी के खतरों, समय पर इलाज और रेफरल के बारे में जागरूक करना।
2. हाई-रिस्क मामलों की ट्रैकिंग: हाई-रिस्क गर्भवती महिलाओं की पहचान करना और उनकी लगातार देखभाल सुनिश्चित करना।
3. डिलीवरी और एम्बुलेंस प्रबंधन: हाई-रिस्क डिलीवरी के लिए पूरी तैयारी रखना और एम्बुलेंस सेवाओं को बेहतर बनाना ताकि अस्पताल पहुंचने में देरी न हो।
4. ब्लड बैंक प्रबंधन: गर्भवती महिलाओं के लिए समय पर रक्त की उपलब्धता सुनिश्चित करना, विशेषकर जिन्हें अत्यधिक रक्तस्राव (ब्लीडिंग) का खतरा हो।