मोहाली : अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश टीपी रंधावा की अदालत ने लॉरेंस बिश्नोई गैंग से कथित तौर पर जुड़े आरोपी अर्जुन कुमार की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि आरोपी पर गंभीर आरोप हैं और उसके कब्जे से बताई जा रही .9 एमएम पिस्टल अभी बरामद नहीं हुई है। हथियार की बरामदगी के लिए आरोपी की हिरासत में पूछताछ जरूरी है। इसी आधार पर अदालत ने राहत देने से इनकार कर दिया।
मामला मई 2023 में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार, 18 मई 2023 को गुप्त सूचना मिली थी कि आरोपी महफूज उर्फ विशाल खान पंजाब में विभिन्न गैंगस्टरों को अवैध हथियार उपलब्ध कराता है और विदेश में बैठे गैंगस्टरों के संपर्क में है। सूचना के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार किया था।
पूछताछ में कई आरोपियों के नाम सामने आए
अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार पूछताछ के दौरान महफूज ने पुलिस को बताया था कि वह अमेरिका गए अजय राणा के संपर्क में था। उसके कहने पर डेराबस्सी-बरवाला रोड स्थित पीर बाबा की दरगाह के पास से उसे पिस्टल से भरा बैग मिला था। पुलिस के मुताबिक इस बैग से तीन .32 बोर की देसी पिस्टल बरामद हुईं, जबकि दो पिस्टल उसने अजय राणा के कहने पर मनजीत सिंह उर्फ गुरी को देने की बात कही।
जांच के दौरान अनिकेत, गोल्डी, मनजीत सिंह उर्फ गुरी, जोगिंदर सिंह उर्फ जोगा, मोंटी, अजय राणा और लॉरेंस बिश्नोई सहित अन्य आरोपियों के नाम सामने आए। पुलिस के अनुसार, अलग-अलग आरोपियों से पिस्टल और कारतूस भी बरामद किए गए।
रंधीर के बयान पर अर्जुन को किया गया था नामजद
पुलिस के अनुसार, जोगिंदर सिंह उर्फ जोगा ने पूछताछ में रंधीर सिंह उर्फ हैप्पी उर्फ कमांडो के संपर्क में होने की बात कही थी। इसके बाद रंधीर सिंह को गिरफ्तार किया गया और उसके कब्जे से .32 बोर की पिस्टल व तीन जिंदा कारतूस बरामद किए गए।
अदालत के रिकॉर्ड के मुताबिक रंधीर सिंह के कथित खुलासे के आधार पर अर्जुन कुमार को मामले में नामजद किया गया। रंधीर ने कथित तौर पर बताया कि अप्रैल 2023 में अर्जुन ने उससे हथियार और गोला-बारूद मांगा था और लॉरेंस बिश्नोई के कहने पर उसने अर्जुन को एक .9 एमएम पिस्टल दी थी। पुलिस का कहना है कि यह हथियार अभी बरामद नहीं हुआ है।
तीन साल बाद नामजद किए जाने की दलील नहीं मानी
अर्जुन के वकील ने अदालत में दलील दी कि उसका लॉरेंस बिश्नोई या मामले के अन्य आरोपियों से कोई संबंध नहीं है और उसे एफआईआर दर्ज होने के करीब तीन साल बाद झूठा फंसाया गया है। उसने जांच में शामिल होने की इच्छा जताते हुए अग्रिम जमानत देने की मांग की।
वहीं, सरकारी वकील ने
जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी पर गंभीर आरोप हैं और उसके कब्जे से पिस्टल बरामद की जानी बाकी है।
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि आरोपी के खिलाफ गंभीर आरोप हैं और उसके कब्जे से कथित .9 एमएम पिस्टल बरामद करना बाकी है। ऐसे में कस्टोडियल पूछताछ आवश्यक है। अदालत ने अग्रिम जमानत का कोई आधार नहीं पाया और अर्जुन कुमार की याचिका खारिज कर दी।