बिना सरकारी सहायता वाले करीब 7,800 निजी स्कूलों के 32 लाख छात्रों को राहत का दावा; पिछले तीन साल में तय सीमा से अधिक फीस बढ़ाने वाले स्कूलों को अतिरिक्त राशि लौटानी होगी। शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने पेश किया संशोधन विधेयक, मुख्यमंत्री भगवंत मान बोले- शिक्षा को कमर्शियल धंधा नहीं बनने देंगे।

चंडीगढ़: पंजाब विधानसभा ने बुधवार को सर्वसम्मति से एक कानून पास किया, जिसके तहत राज्य के बिना सरकारी मदद वाले प्राइवेट स्कूलों में सालाना फीस बढ़ोतरी को 5 प्रतिशत तक सीमित कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि इस कदम से लगभग 7,800 प्राइवेट स्कूलों में पढ़ रहे करीब 32 लाख छात्रों को राहत मिलेगी।

शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस द्वारा पेश किए गए 'पंजाब रेगुलेशन ऑफ फीस ऑफ अनएडेड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस (संशोधन) बिल, 2026' का मकसद सालाना फीस बढ़ोतरी को रेगुलेट करना है, जिसमें ट्यूशन फीस के अलावा अन्य शुल्क भी शामिल हैं।

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि जिन स्कूलों ने पिछले तीन वर्षों में तय सीमा से अधिक फीस बढ़ाई है, उन्हें अतिरिक्त राशि वापस करनी होगी। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा को कमर्शियल धंधा नहीं बनने देगी।

मान ने अमृतसर में एक युवा लड़की की आत्महत्या का ज़िक्र किया, जिसके परिवार के बारे में उन्होंने कहा कि वे उसकी स्कूल फीस नहीं भर पा रहे थे और उन्हें स्कूल मैनेजमेंट से अपमान का सामना करना पड़ा था।

मुख्यमंत्री ने कोविड-19 महामारी के दौरान स्कूल बंद रहने के बावजूद ट्रांसपोर्टेशन फीस वसूलने को लेकर पिछली कांग्रेस सरकार की भी आलोचना की।

हालांकि, कांग्रेस विधायक और पूर्व शिक्षा मंत्री परगट सिंह ने इस कानून को "नई बोतल में पुरानी शराब" बताया। उन्होंने बताया कि फीस बढ़ोतरी की पिछली सीमा 8 प्रतिशत थी और सवाल उठाया कि क्या नए प्रावधानों का असर पिछली तारीख से लागू होगा।

सिंह ने यह भी तर्क दिया कि एक व्यापक शिक्षा नीति की ज़रूरत है, जिसमें फैकल्टी की भर्ती और वेतन से जुड़े उपाय भी शामिल हों।

कांग्रेस विधायक अवतार हेनरी जूनियर ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह सरकारी स्कूलों में एनरोलमेंट (दाखिले) में गिरावट से ध्यान हटाने के लिए इस कानून का इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने दावा किया कि 2022 और 2026 के बीच सरकारी स्कूलों में एनरोलमेंट में लगभग छह लाख की कमी आई है। उन्होंने प्राइवेट स्कूलों की फीस को रेगुलेट करने के लिए बनाई गई कमेटियों में शिक्षकों का प्रतिनिधित्व भी मांगा।

विधानसभा ने तीन अलग-अलग बिल भी पास किए, जिनसे तीन डिजिटल ओपन यूनिवर्सिटी — क्लाउड यूनिवर्सिटी, MS डिजिटल यूनिवर्सिटी और फिजिक्सवाला डिजिटल यूनिवर्सिटी — की स्थापना का रास्ता साफ हो गया।

बैंस ने कहा कि ये नए संस्थान छात्रों को बदलते रोज़गार परिदृश्य और उभरती डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए ज़रूरी स्किल्स से लैस करेंगे। हालांकि, यूनिवर्सिटी बिल पास होने के दौरान कांग्रेस सदस्यों और निर्दलीय विधायक राणा इंदर प्रताप ने विरोध किया। विपक्ष ने राणा इंदर प्रताप को बहस में शामिल होने के लिए और समय देने की मांग की, लेकिन स्पीकर ने इस मांग को खारिज कर दिया।

इसके बाद कांग्रेस विधायकों और निर्दलीय विधायक ने सदन के बीचों-बीच आकर स्पीकर और सरकार के खिलाफ नारे लगाए। विरोध के बावजूद बिल पास कर दिए गए।