शिमला (Naren Danu) : राजधानी शिमला में रातभर हुई बारिश और मौसम विभाग के भारी बारिश के अलर्ट के बीच सोमवार सुबह सोशल मीडिया पर एक ऐसा आदेश तेजी से वायरल हुआ, जिसने विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षण संस्थानों में भ्रम पैदा कर दिया। वायरल पत्र में दावा किया गया कि 10 अगस्त को शिमला जिले के सभी स्कूल-कॉलेज और अन्य शिक्षण संस्थान बंद रहेंगे। पत्र पर जिला उपायुक्त के नाम और हस्ताक्षर भी लगाए गए थे। हालांकि, प्रशासन ने जांच के बाद इसे पूरी तरह फर्जी करार दिया है।
डीसी के नाम और सिग्नेचर तक का इस्तेमाल
वायरल पत्र में शिमला जिले के सरकारी और निजी स्कूलों के साथ कॉलेज, आंगनबाड़ी केंद्र, आईटीआई, पॉलिटेक्निक, कोचिंग सेंटर और नर्सिंग संस्थानों को बंद रखने का दावा किया गया था।
पत्र में लगातार बारिश, भूस्खलन, पेड़ गिरने और सड़कें बाधित होने जैसी वास्तविक परिस्थितियों का हवाला दिया गया। साथ ही मौसम विभाग के पूर्वानुमान का भी जिक्र किया गया। पत्र को विश्वसनीय दिखाने के लिए जिला दंडाधिकारी एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष के नाम और हस्ताक्षर तक का इस्तेमाल किया गया।
मौसम खराब, इसलिए तेजी से फैला फर्जी आदेश
फर्जी आदेश ऐसे वक्त सामने आया जब हिमाचल में मौसम वास्तव में खराब बना हुआ है। शिमला समेत कई इलाकों में रातभर बारिश हुई और सोमवार को भी मौसम खराब रहा। मौसम विभाग ने 10 और 11 अगस्त को राज्य के कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश का ओरेंज अलर्ट जारी किया है।
इसी वास्तविक मौसम स्थिति का फायदा उठाकर तैयार किए गए फर्जी आदेश ने लोगों के बीच भ्रम की आशंका बढ़ा दी।
प्रशासन की दो टूक—‘सोशल मीडिया के आदेश पर भरोसा न करें’
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा पत्र प्रशासन द्वारा जारी नहीं किया गया है। किसी शिक्षण संस्थान को बंद करने या छुट्टी घोषित करने संबंधी आदेश केवल जिला प्रशासन या संबंधित विभाग के अधिकृत माध्यमों से जारी किया जाता है।
प्रशासन ने विद्यार्थियों और अभिभावकों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित किसी भी आदेश को बिना पुष्टि के आगे न भेजें। छुट्टी या अन्य प्रशासनिक निर्देशों की जानकारी के लिए संबंधित विभाग अथवा जिला प्रशासन के आधिकारिक माध्यमों से ही पुष्टि करें।
फर्जी सरकारी दस्तावेज बनाने वालों पर कार्रवाई
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी सरकारी अधिकारी के नाम और हस्ताक्षर का इस्तेमाल कर फर्जी दस्तावेज तैयार करना गंभीर मामला है। ऐसे दस्तावेज तैयार करने और उन्हें सोशल मीडिया पर प्रसारित करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर वायरल सरकारी आदेशों की सत्यता जांचने की जरूरत सामने ला दी है। खासकर आपदा और खराब मौसम जैसी परिस्थितियों में प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि किसी भी सूचना को साझा करने से पहले उसकी आधिकारिक पुष्टि जरूर करें।