राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार धनसिरि और कुसियारा नदियां अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। गोलाघाट और कार्बी आंगलोंग में दो और शव मिलने से बाढ़ में मृतकों की संख्या बढ़कर 101 हो गई। 10 जिलों में 1,37,290 लोग प्रभावित हैं, जबकि 11,933 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि जलमग्न है। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।

गुवाहाटी (Naren Danu) : असम में बाढ़ का पानी भले कुछ इलाकों से उतरने लगा हो, लेकिन संकट अभी खत्म नहीं हुआ है। ऊपरी असम के शिवसागर, चराईदेव और जोरहाट में हालात अब भी चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं और हजारों परिवार राहत के भरोसे हैं। इस बीच राज्य सरकार ने बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन शुरू कर दिया है, ताकि प्रभावित क्षेत्रों में राहत और पुनर्वास की अगली रणनीति तय की जा सके।

राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के 9 अगस्त तक के आंकड़ों के मुताबिक धनसिरि नदी नुमलीगढ़ और गोलाघाट में तथा कुसियारा नदी श्रीभूमि में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। रविवार को गोलाघाट और कार्बी आंगलोंग में एक-एक शव मिलने के बाद बाढ़ से राज्य में मरने वालों की संख्या बढ़कर 101 हो गई है।

10 जिलों में बाढ़ का असर, 456 गांव प्रभावित

फिलहाल गोलाघाट, शिवसागर, होजाई, दरंग, लखीमपुर, जोरहाट, कार्बी आंगलोंग, चराईदेव, नगांव और बिश्वनाथ समेत 10 जिले बाढ़ की चपेट में हैं। इन जिलों के 28 राजस्व मंडलों के 456 गांव प्रभावित हुए हैं।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार राज्य में अभी भी 1,37,290 लोग बाढ़ से प्रभावित हैं, जबकि 11,933.46 हेक्टेयर कृषि भूमि पानी में डूबी हुई है। कई इलाकों में सड़क, पुल और अन्य बुनियादी ढांचे को भी व्यापक नुकसान पहुंचा है, जिससे सामान्य जनजीवन की बहाली चुनौती बनी हुई है।

राहत शिविरों में 8 हजार लोग, 41 हजार को वितरण केंद्रों से मदद

सरकार ने प्रभावित आबादी के लिए 52 राहत शिविर और 73 राहत वितरण केंद्र सक्रिय रखे हैं। इन राहत शिविरों में करीब 8,000 लोग शरण लिए हुए हैं। वहीं, 41,061 गैर-शिविर निवासी राहत वितरण केंद्रों के माध्यम से आवश्यक सहायता प्राप्त कर रहे हैं।

बाढ़ से निपटने के लिए बहु-एजेंसी ऑपरेशन

राज्य में राहत और बचाव अभियान को तेज रखने के लिए एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, सेना, अर्धसैनिक बल, डीडीआरएफ, वायुसेना, पुलिस, अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं के साथ स्थानीय प्रशासन, नागरिक सुरक्षा और प्रशिक्षित स्वयंसेवकों को मैदान में उतारा गया है।

सरकार अब प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का जमीनी आकलन कर रही है। इसके आधार पर क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे की मरम्मत, प्रभावित परिवारों को राहत और पुनर्वास कार्यों को आगे बढ़ाया जाएगा। असम में बाढ़ का पानी घटने के बावजूद प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती अब जनजीवन को सामान्य पटरी पर लौटाना और बाढ़ से तबाह हुए इलाकों को दोबारा खड़ा करना है।