विभिन्न पंथक संगठनों की ओर से आयोजित संयुक्त समागम में बड़ी संख्या में संगत ने भाग लिया। अखंड कीर्तनी जत्थे ने गुरबाणी कीर्तन किया, जबकि ढाडी और कविशरी जत्थों ने प्रस्तुतियां दीं। कार्यक्रम में 1978 की बैसाखी के बाद पंजाब के हालात और उस दौर की घटनाओं पर वक्ताओं ने विचार रखे। विभिन्न परिवारों और पंथक संगठनों के प्रतिनिधियों को सम्मानित भी किया गया।

अमृतसर (आर.के. उप्पल) : गांव दासूवाल स्थित गुरुद्वारा साहिब में सुखदेव सिंह बब्बर की 34वीं बरसी और उनके बड़े भाई महल सिंह बब्बर की स्मृति में विभिन्न पंथक संगठनों की ओर से संयुक्त समागम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में क्षेत्रवासियों और पंथक संगठनों से जुड़े लोगों ने भाग लिया।

समागम की शुरुआत अखंड कीर्तनी जत्थे के सिंहों द्वारा गुरबाणी कीर्तन से हुई। इसके बाद ढाडी और कविशरी जत्थों ने अपनी प्रस्तुतियां दीं। वक्ताओं ने 1978 की बैसाखी के बाद पंजाब में बने हालात और उस दौर की विभिन्न घटनाओं का उल्लेख करते हुए अपने विचार रखे।

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न परिवारों और पंथक संगठनों से जुड़े प्रतिनिधियों को सम्मानित भी किया गया। समागम का संचालन जत्थेदार बख्शीश सिंह ने किया।

इस अवसर पर भाई सतनाम सिंह खंडा, भाई सतनाम सिंह झंझियां, भाई तरलोक सिंह, प्रो. बलजिंदर सिंह, भूपिंदर सिंह पहलवान जर्मनी, महांबीर सिंह सुल्तानविंड, डॉ. सुखदेव सिंह बाबा और एडवोकेट जसपाल सिंह मंझपुर सहित कई पंथक नेता और संगत के सदस्य मौजूद रहे। आयोजकों ने कार्यक्रम में पहुंचे लोगों का आभार व्यक्त किया।