मेघा और निधि की ओर से आयोजित तीज उत्सव में महिलाओं ने पारंपरिक परिधानों में सजकर मेहंदी, लोकगीत, नृत्य और मनोरंजक प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया। पंजाबी संस्कृति की झलक ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। आयोजकों ने कहा कि ऐसे आयोजन महिलाओं को आपसी मेल-जोल का अवसर देने के साथ नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और पारंपरिक विरासत से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

जीरकपुर : तीज पर्व के अवसर पर रविवार को शहर में पारंपरिक उल्लास और उमंग देखने को मिली। मेघा और निधि की ओर से आयोजित तीज उत्सव में करीब 80 महिलाओं ने भाग लिया। रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाओं ने गीत-संगीत, मेहंदी, नृत्य और विभिन्न मनोरंजक गतिविधियों के साथ त्योहार की खुशियां साझा कीं।

कार्यक्रम में पंजाबी और पारंपरिक लोकगीतों की धुन पर महिलाओं ने जमकर नृत्य किया। इस दौरान आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में भी महिलाओं ने उत्साह के साथ भाग लिया। आकर्षक व्यक्तित्व और प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन के आधार पर अनुप्रिया कालरा को तीज क्वीन चुना गया। आयोजकों ने उन्हें सम्मानित कर शुभकामनाएं दीं।

नई पीढ़ी को परंपराओं से जोड़ने का प्रयास

आयोजन के दौरान भारतीय संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों से जुड़े पहलुओं को भी प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया। महिलाओं ने कहा कि तीज केवल पर्व नहीं, बल्कि आपसी प्रेम, सौहार्द और सांस्कृतिक परंपराओं को संजोने का माध्यम भी है। ऐसे कार्यक्रम नई पीढ़ी को अपनी लोक संस्कृति और परंपराओं के करीब लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

सांस्कृतिक आयोजन बढ़ाते हैं आपसी मेल-जोल

आयोजक मेघा और निधि ने कहा कि भागदौड़ भरी जिंदगी में ऐसे आयोजन महिलाओं को एक-दूसरे के साथ समय बिताने और अपनी संस्कृति को जीने का अवसर देते हैं। इससे महिलाओं के बीच आपसी मेल-जोल भी बढ़ता है। कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रतिभागियों ने भविष्य में भी इस तरह के सांस्कृतिक आयोजन जारी रखने की बात कही।