अमृतसर : पंजाब भाजपा के प्रवक्ता एवं सिख चिंतक प्रो. सरचंद सिंह ख्याला ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत को कनाडा में प्रवेश न देने की न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी (NDP) की मांग की कड़ी निंदा की है। उन्होंने इसे चयनात्मक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, वैचारिक पक्षपात और भारत-विरोधी वोट-बैंक की राजनीति का उदाहरण बताया।
प्रो. ख्याला ने कहा कि किसी लोकतांत्रिक देश में किसी व्यक्ति को केवल उसकी वैचारिक या संगठनात्मक पहचान के आधार पर प्रवेश से रोकने की मांग गंभीर सवाल खड़े करती है। यदि NDP के पास मोहन भागवत या RSS के खिलाफ कोई ठोस और कानूनी रूप से प्रमाणित साक्ष्य है, तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि राजनीतिक आरोप कानूनी साक्ष्य का विकल्प नहीं हो सकते।
उन्होंने RSS को नफरत और हिंसा से जोड़ने वाले आरोपों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि वैचारिक असहमति लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन असहमति को तथ्यों का विकल्प नहीं बनाया जा सकता। उनके अनुसार RSS की सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों तथा इससे जुड़े सेवा और जनकल्याण कार्यों को केवल राजनीतिक नैरेटिव के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता।
भारत-पक्षीय विचारों को भी मिले समान अधिकार
प्रो. ख्याला ने सवाल उठाया कि यदि भारत-विरोधी विचारों को कनाडा में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के तहत संरक्षण प्राप्त है, तो भारत-पक्षीय विचार रखने वालों को वही अधिकार क्यों नहीं मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की वास्तविक परीक्षा अपने समान विचार रखने वालों को स्वतंत्रता देने में नहीं, बल्कि अलग विचार रखने वालों के अधिकारों की रक्षा करने में होती है।
उन्होंने NDP से कनाडाई धरती से भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ दी जाने वाली धमकियों, हिंसक बयानों और अलगाववादी गतिविधियों पर अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की। साथ ही कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लोकतंत्र की बुनियाद है, लेकिन इसे हिंसा, धमकी या अतिवाद का लाइसेंस नहीं बनाया जा सकता।
वोट-बैंक की राजनीति से ऊपर उठे NDP
प्रो. ख्याला ने कहा कि मोहन भागवत को कनाडा आने से रोकने की मांग केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं, बल्कि वैचारिक आवाज को दबाने के प्रयास के रूप में भी देखी जा सकती है। उन्होंने कनाडा से कानून, तथ्यों और लोकतांत्रिक बहस के आधार पर निर्णय लेने तथा सभी के लिए समान मानदंड अपनाने की अपील की।
उन्होंने कहा कि NDP को भारत-विरोधी वोट-बैंक की राजनीति से ऊपर उठकर कनाडा की सुरक्षा, कानून की निष्पक्षता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने दोहराया कि यदि RSS के खिलाफ साक्ष्य हैं तो उन्हें सामने लाया जाए, लेकिन बिना ठोस प्रमाण के राजनीतिक आरोपों की राजनीति नहीं होनी चाहिए।