भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं राज्यसभा सदस्य डॉ. मेधा विश्राम कुलकर्णी ने आईडीबीआई बैंक की ‘आई-दोस्त’ योजना को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने का प्रस्ताव प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भेजा है। प्रस्तावित ‘एन-आई दोस्त’ योजना के तहत नौकरी के दौरान कर्मचारी की असमय मृत्यु पर परिवार को कम से कम 10 लाख रुपये की सहायता देने का सुझाव है। इसमें कर्मचारी, नियोक्ता और सरकार के योगदान की बात कही गई है।

नई दिल्ली (Naren Danu) : नौकरी के दौरान किसी कर्मचारी की असमय मृत्यु होने की स्थिति में उसके परिवार को आर्थिक सुरक्षा देने के उद्देश्य से भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और राज्यसभा सांसद डॉ. मेधा विश्राम कुलकर्णी ने एक नई राष्ट्रीय कल्याणकारी योजना का प्रस्ताव रखा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर आईडीबीआई बैंक की 'आई-दोस्त' योजना के मॉडल पर आधारित योजना को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने का अनुरोध किया है।

सांसद द्वारा शनिवार को जारी पत्र में प्रस्तावित योजना का नाम 'नेशनल आई-दोस्त बेनेवोलेंट स्कीम' बताया गया है। इसका उद्देश्य संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों में काम करने वाले कर्मचारियों के परिवारों को कर्मचारी की सेवा के दौरान असामयिक मृत्यु की स्थिति में अतिरिक्त वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना है।

IDBI की 'आई-दोस्त' योजना कैसे काम करती है?

आईडीबीआई बैंक ने वर्ष 2021 में अपने कर्मचारियों के लिए 'आई-दोस्त' नाम से पारस्परिक सहायता एवं कल्याण योजना शुरू की थी। योजना के तहत सेवा के दौरान किसी कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके परिवार को अन्य निर्धारित लाभों के अतिरिक्त 8 लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाती है।

यह एक स्व-योगदान आधारित योजना है, जिसमें कर्मचारियों के वेतन से श्रेणी के अनुसार राशि जमा की जाती है। प्रस्ताव के मुताबिक ग्रेड डी और उससे ऊपर के अधिकारियों से 100 रुपये, ग्रेड ए-सी अधिकारियों से 60 रुपये तथा श्रमिक या अनुबंध कर्मचारियों से 25 रुपये प्रति मृत्यु प्रति माह का योगदान लिया जाता है। कर्मचारियों को योजना से बाहर निकलने का विकल्प भी दिया गया है।

राष्ट्रीय स्तर पर 'N-आई दोस्त' योजना का प्रस्ताव

डॉ. मेधा कुलकर्णी ने केंद्र सरकार से इसी मॉडल को व्यापक रूप देकर संगठित और असंगठित क्षेत्र के कर्मचारियों तक पहुंचाने का सुझाव दिया है।

प्रस्तावित योजना के तहत कर्मचारी की सेवा के दौरान मृत्यु होने पर उसके परिवार को कम से कम 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का प्रस्ताव है।

बड़े संगठनों—जैसे रेलवे, सिविल सेवा और आईओसीएल—में कर्मचारियों की संख्या एवं योगदान क्षमता के आधार पर यह सहायता राशि 40 लाख रुपये से लेकर एक करोड़ रुपये तक तय किए जाने का सुझाव दिया गया है।

कर्मचारी, नियोक्ता और सरकार मिलकर बनाएंगे सुरक्षा कवच

प्रस्ताव में योजना के लिए एक विशेष कल्याण कोष बनाने का सुझाव दिया गया है, जिसमें कर्मचारी, नियोक्ता और सरकार मिलकर योगदान करेंगे।

वहीं असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए सरकारी योगदान अनिवार्य करने का प्रस्ताव रखा गया है, ताकि ऐसे कर्मचारी भी इस सामाजिक सुरक्षा तंत्र से बाहर न रह जाएं जिनके पास नियमित नियोक्ता आधारित सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध नहीं है।

EPF, ESIC और सरकारी बीमा योजनाओं को मिलेगा अतिरिक्त सहारा

प्रस्ताव के अनुसार, राष्ट्रीय 'आई-दोस्त' योजना मौजूदा सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का विकल्प नहीं होगी, बल्कि उन्हें और मजबूत करने का काम करेगी। इसे EPF, ESIC, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY) और प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY) जैसी मौजूदा व्यवस्थाओं के अतिरिक्त सुरक्षा कवच के रूप में विकसित करने का सुझाव दिया गया है।

इस योजना का उद्देश्य कर्मचारी की आकस्मिक मृत्यु के बाद परिवार पर पड़ने वाले तत्काल आर्थिक दबाव को कम करना और बच्चों तथा आश्रितों के भविष्य को अधिक सुरक्षित बनाना है।

'राष्ट्र एक परिवार है' की भावना को मजबूत करने का दावा

प्रस्ताव में कहा गया है कि यदि ऐसी योजना राष्ट्रीय स्तर पर लागू होती है तो इससे करोड़ों कामकाजी परिवारों को अतिरिक्त सामाजिक सुरक्षा मिल सकती है। प्रस्ताव के अनुसार यह पहल 'सबका साथ, सबका विकास' और 'राष्ट्र एक परिवार है' की भावना को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

फिलहाल यह एक प्रस्ताव है। इसे राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने का निर्णय केंद्र सरकार द्वारा इसके वित्तीय, प्रशासनिक और कानूनी पहलुओं के मूल्यांकन के बाद ही लिया जाएगा।