भोपाल में आयोजित चार दिवसीय ब्रिक्स संस्कृति सम्मेलन-2026 का शनिवार को समापन होगा। भारत की अध्यक्षता में होने वाली संस्कृति मंत्रियों की बैठक में सांस्कृतिक विरासत, संग्रहालय, रचनात्मक अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। बैठक के अंत में ‘ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की घोषणा’ अपनाई जाएगी, जो भविष्य में सदस्य और भागीदार देशों के बीच सांस्कृतिक सहयोग की दिशा तय करेगी।

भोपाल (Naren Danu) : मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित चार दिवसीय BRICS संस्कृति सम्मेलन-2026 का शनिवार को भव्य समापन होने जा रहा है। केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के तत्वावधान में आयोजित इस सम्मेलन के अंतिम दिन BRICS देशों के संस्कृति मंत्री एक अहम बैठक में शामिल होंगे और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगे।

भारत की अध्यक्षता में होने वाली यह तीसरी BRICS संस्कृति मंत्रियों की बैठक सांस्कृतिक सहयोग को नई दिशा देने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बैठक में सदस्य एवं भागीदार देशों के बीच सांस्कृतिक विरासत, संग्रहालय, रचनात्मक अर्थव्यवस्था, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, क्षमता निर्माण और लोगों के बीच संपर्क को मजबूत करने पर चर्चा होगी।

BRICS संस्कृति मंत्रियों की घोषणा से तय होगा भविष्य का रोडमैप

बैठक का समापन 'BRICS संस्कृति मंत्रियों की घोषणा' को अपनाने के साथ होगा। यह घोषणा BRICS देशों के बीच सांस्कृतिक सहयोग के लिए साझा दृष्टिकोण और भविष्य की प्राथमिकताओं का खाका तैयार करेगी।

इसके जरिए सदस्य और भागीदार देशों के बीच सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, ज्ञान के आदान-प्रदान और रचनात्मक क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने की दिशा तय होने की उम्मीद है।

मंत्रीस्तरीय बैठक के बाद सांची पहुंचेगा विदेशी प्रतिनिधिमंडल

मंत्रीस्तरीय बैठक के बाद BRICS देशों के प्रतिनिधिमंडल सांची के लिए रवाना होंगे। यहां उन्हें भारत की समृद्ध बौद्ध विरासत, प्राचीन स्थापत्य कला और सांस्कृतिक परंपरा से रूबरू कराया जाएगा।

प्रतिनिधि सबसे पहले 'बुद्ध जंबूदीप' का भ्रमण करेंगे और इसके बाद विश्व प्रसिद्ध सांची स्तूप का विशेष गाइडेड टूर करेंगे।

चेतियागिरी मंदिर में दर्शन, योग और ध्यान से जुड़ेंगे प्रतिनिधि

सांची यात्रा के दौरान प्रतिनिधिमंडल चेतियागिरी मंदिर में दर्शन करेंगे। इसके साथ ही प्रतिनिधियों के लिए योग एवं ध्यान सत्र का भी आयोजन किया जाएगा, जिसके जरिए भारत की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं का अनुभव कराया जाएगा।

थ्रीडी मैपिंग और लाइट एंड साउंड शो बनेगा आकर्षण

दिनभर के सांस्कृतिक अनुभव के बाद शाम को सांची में बौद्ध इतिहास और कला पर आधारित विशेष थ्रीडी प्रोजेक्शन मैपिंग का आयोजन होगा। इसके साथ ही आकर्षक लाइट एंड साउंड शो के माध्यम से भारत की बौद्ध विरासत, इतिहास और स्थापत्य कला की भव्य प्रस्तुति विदेशी मेहमानों के सामने रखी जाएगी।

चार दिनों तक चले इस सम्मेलन का समापन इस संदेश के साथ होगा कि सांस्कृतिक विरासत केवल अतीत की पहचान नहीं, बल्कि देशों और समाजों को जोड़ने वाली साझी शक्ति और भविष्य के सहयोग का मजबूत आधार भी है।