गुवाहाटी (Naren Danu) : असम में आई विनाशकारी बाढ़ का पानी धीरे-धीरे उतरने लगा है, लेकिन राज्य के बड़े हिस्से में संकट अभी भी गहरा बना हुआ है। ऊपरी असम के शिवसागर, चराईदेव, जोरहाट और गोलाघाट समेत कई जिलों में बाढ़ ने सामान्य जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। हालात सुधरने के बावजूद प्रभावित परिवारों को पूरी तरह सामान्य स्थिति में लौटने में लंबा वक्त लग सकता है।
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) के 7 अगस्त के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में बाढ़ से अब तक 97 लोगों की मौत हो चुकी है। शुक्रवार को चराईदेव जिले से एक और शव बरामद होने के बाद मृतकों का आंकड़ा बढ़ा है।
दो नदियां अब भी खतरे के निशान से ऊपर
बाढ़ का खतरा पूरी तरह टला नहीं है। धनसिरि नदी नुमलीगढ़ और गोलाघाट क्षेत्र में तथा कुसियारा नदी श्रीभूमि क्षेत्र में अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। नदियों के जलस्तर को लेकर प्रभावित इलाकों में लोगों के बीच चिंता बनी हुई है।
13 जिलों के 464 गांवों पर बाढ़ की मार
फिलहाल राज्य के 13 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं। इनमें शिवसागर, गोलाघाट, नगांव, होजाई, शोणितपुर, धेमाजी, दरंग, बिश्वनाथ, कामरूप मेट्रो, लखीमपुर, उदालगुड़ी, जोरहाट और चराईदेव शामिल हैं।
इन जिलों के 33 राजस्व मंडलों के 464 गांव बाढ़ की चपेट में हैं। कुल 1,55,849 लोग अब भी प्रभावित हैं, जबकि 10,748.64 हेक्टेयर कृषि भूमि पानी में डूबी हुई है।
73 राहत केंद्र सक्रिय, हजारों लोगों को मिल रहा सहारा
प्रशासन ने प्रभावित लोगों के लिए राहत व्यवस्था जारी रखी है। राज्य में 55 राहत शिविर और 18 राहत वितरण केंद्र, यानी कुल 73 राहत केंद्र सक्रिय हैं।
इन राहत शिविरों में 10,326 लोग शरण लिए हुए हैं, जबकि राहत वितरण केंद्रों के माध्यम से 6,881 गैर-शिविर प्रभावित लोगों को भी आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
हजारों पशु भी बाढ़ से प्रभावित
बाढ़ ने इंसानों के साथ-साथ पशुधन को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार करीब 47,879 पशु प्रभावित हुए हैं। इनमें 22,846 बड़े पशु, 18,083 छोटे पशु और 6,950 मुर्गी-पक्षी शामिल हैं।
सैकड़ों घर क्षतिग्रस्त, शिवसागर सबसे ज्यादा प्रभावित
बाढ़ के पानी से 122 कच्चे मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं। इनमें अकेले शिवसागर में 120 और धेमाजी में दो मकान शामिल हैं। वहीं शिवसागर में चार पक्के मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं।
इसके अलावा 268 कच्चे मकानों को आंशिक नुकसान पहुंचा है। इनमें शिवसागर के 216, दरंग के 50 और धेमाजी के दो मकान शामिल हैं। शिवसागर में 76 पक्के मकानों को भी आंशिक क्षति पहुंची है। जिले में 213 मवेशी शेड भी क्षतिग्रस्त हुए हैं।
बचाव अभियान में जुटी पूरी सरकारी मशीनरी
बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, सेना, अर्धसैनिक बल, एयरफोर्स, पुलिस, अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं, स्थानीय प्रशासन और प्रशिक्षित स्वयंसेवक अभियान में जुटे हुए हैं।
राज्य सरकार ने शुक्रवार को प्रभावित इलाकों में 219 मेडिकल टीमों को तैनात किया। इसके अलावा 8 नावें राहत अभियान में लगाई गईं। नावों के जरिए 112 लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया।
राहत सामग्री की आपूर्ति जारी
बाढ़ पीड़ितों के बीच सरकार की ओर से बड़ी मात्रा में खाद्य सामग्री और पशु चारा वितरित किया गया है। राहत सामग्री में 121.098 क्विंटल चावल, 22.413 क्विंटल दाल, 6.7329 क्विंटल नमक और 477.37 लीटर सरसों का तेल शामिल है।
पशुओं के लिए 278.791 क्विंटल गेहूं का चोकर और 75.4 क्विंटल चावल का चोकर भी वितरित किया गया है।
सड़क-पुलों को भारी नुकसान, पुनर्निर्माण की चुनौती
बाढ़ से राज्य के कई हिस्सों में सड़क, पुल और अन्य बुनियादी ढांचे को व्यापक नुकसान पहुंचा है। पानी उतरने के बाद सरकार के सामने इन क्षतिग्रस्त संरचनाओं की मरम्मत और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की बड़ी चुनौती होगी।
मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा और राज्य सरकार के कई मंत्री लगातार अधिकारियों के साथ बैठक कर राहत, बचाव और पुनर्वास कार्यों की समीक्षा कर रहे हैं। सरकार का दावा है कि प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता पहुंचाने के साथ-साथ बाढ़ से हुए नुकसान की भरपाई और सामान्य जनजीवन की बहाली के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।