ब्रिक्स संस्कृति सम्मेलन-2026 के तीसरे दिन भोपाल में सदस्य देशों के संस्कृति मंत्री पहुंचेंगे। रवींद्र भवन में आयोजित सांस्कृतिक महोत्सव में भारत समेत 11 देशों के कलाकार संगीत और कला की प्रस्तुतियां देंगे। ‘ब्रिक्स पीस सॉन्ग’ के जरिए वैश्विक शांति और एकता का संदेश दिया जाएगा। वहीं ‘अमृतस्य मध्य प्रदेश’ प्रस्तुति में प्रदेश की ऐतिहासिक, आध्यात्मिक और लोक संस्कृति की झलक दिखाई जाएगी।

भोपाल (Naren Danu) : मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल इन दिनों वैश्विक सांस्कृतिक संवाद का केंद्र बनी हुई है। केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के तत्वावधान में आयोजित चार दिवसीय ब्रिक्स संस्कृति सम्मेलन-2026 के तीसरे दिन शुक्रवार को ब्रिक्स देशों के संस्कृति मंत्री भोपाल पहुंचेंगे। वहीं, शाम को रविंद्र भवन में आयोजित होने वाला ‘ब्रिक्स सांस्कृतिक महोत्सव-2026’ विभिन्न देशों की कला, संगीत और सांस्कृतिक विरासत का भव्य संगम प्रस्तुत करेगा।

जनसम्पर्क विभाग के अनुसार, इस महोत्सव को भारत और ब्रिक्स सदस्य देशों के प्रसिद्ध कलाकारों एवं संगीतकारों के संयुक्त प्रयास से तैयार किया गया है। कार्यक्रम की शुरुआत ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ के संदेश के साथ होगी, जिसके बाद भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा को दर्शाने वाला ‘कलर्स ऑफ इंडियन म्यूजिक’ प्रस्तुत किया जाएगा।

पीस सॉन्ग में दिखेगी 11 देशों की सांस्कृतिक झलक

महोत्सव का मुख्य आकर्षण ‘ब्रिक्स पीस सॉन्ग- पीस इज द लैंग्वेज ऑफ द लैंड’ रहेगा। इस प्रस्तुति में ब्रिक्स देशों की संगीत परंपराओं को एक मंच पर पिरोया जाएगा। इसमें बेलारूस, ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात की सांस्कृतिक धुनों का समावेश होगा।

कार्यक्रम में ‘पीस टू ऑल’, ‘हार्मनी टू ऑल’ और ‘क्रेस्केंडो ऑफ यूनिटी’ जैसी भव्य ऑर्केस्ट्रा प्रस्तुतियां भी दर्शकों को आकर्षित करेंगी।

‘अमृतस्य मध्य प्रदेश’ में दिखेगी प्रदेश की सभ्यतागत यात्रा

महोत्सव का समापन मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को समर्पित विशेष प्रस्तुति ‘अमृतस्य मध्य प्रदेश- एक अलौकिक सांस्कृतिक महायात्रा’ से होगा। प्रसिद्ध कोरियोग्राफर मैत्रेयी पहाड़ी के निर्देशन में 125 से अधिक कलाकार मध्य प्रदेश की हजारों वर्षों पुरानी सांस्कृतिक यात्रा को मंच पर जीवंत करेंगे।

यह प्रस्तुति ॐ की अनादि ध्वनि से शुरू होकर भीमबेटका, सांची और खजुराहो जैसे यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों से होते हुए चित्रकूट के राम-पथ गमन और उज्जैन के संदीपनि आश्रम की कृष्ण-लीला तक पहुंचेगी।

इसमें ग्वालियर, ओरछा और मांडू के ऐतिहासिक गौरव, महेश्वरी और चंदेरी वस्त्र कला, बैगा, मटकी और बधाई जैसे लोकनृत्यों की झलक भी देखने को मिलेगी। भोपाल की झीलों, उज्जैन की महाकाल नगरी, ओंकारेश्वर की आध्यात्मिक परंपरा और मां नर्मदा की महाआरती के माध्यम से यह प्रस्तुति अतिथियों को सिंहस्थ कुंभ-2028 का आध्यात्मिक निमंत्रण भी देगी।

शनिवार को होगी ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की बैठक

ब्रिक्स संस्कृति सम्मेलन के तहत शनिवार को भारत की अध्यक्षता में तीसरी ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की बैठक आयोजित होगी। इसमें सदस्य और भागीदार देश सांस्कृतिक विरासत संरक्षण, संग्रहालयों, रचनात्मक अर्थव्यवस्था, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, क्षमता निर्माण और जन-जन के संपर्क को मजबूत करने पर चर्चा करेंगे।

बैठक के अंत में ‘ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की घोषणा’ को स्वीकार किया जाएगा, जिसमें भविष्य के सांस्कृतिक सहयोग का रोडमैप तय होगा।

प्रतिनिधिमंडल करेगा सांची का दौरा

मंत्रीस्तरीय बैठक के बाद विदेशी प्रतिनिधिमंडल यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल सांची का दौरा करेगा। प्रतिनिधि बौद्ध विरासत और स्थापत्य कला का अवलोकन करेंगे। कार्यक्रम के दौरान बुद्ध जंबूदीप भ्रमण, सांची स्तूप का विशेष गाइडेड टूर, चेतियागिरी मंदिर में दर्शन, योग एवं ध्यान सत्र के साथ बौद्ध इतिहास पर आधारित थ्रीडी प्रोजेक्शन मैपिंग और लाइट एंड साउंड शो का आयोजन भी किया जाएगा।

भोपाल में हो रहा यह आयोजन भारत की सांस्कृतिक शक्ति, विविधता और वैश्विक सहयोग की भावना को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित कर रहा है।