नई दिल्ली (Naren Danu) : दुनिया में बढ़ती स्वास्थ्य सेवाओं की लागत और इलाज के लिए लंबी प्रतीक्षा अवधि के बीच भारत मेडिकल वैल्यू ट्रैवल (एमवीटी) के क्षेत्र में एक बड़े वैश्विक केंद्र के रूप में उभर रहा है। आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं, अनुभवी चिकित्सकों और आयुर्वेद, योग व अन्य पारंपरिक उपचार पद्धतियों के संगम ने भारत को विदेशी मरीजों के लिए भरोसेमंद स्वास्थ्य गंतव्य बना दिया है।
वैश्विक स्तर पर मेडिकल टूरिज्म उद्योग तेजी से विस्तार कर रहा है। वर्ष 2022 में इसका बाजार करीब 115.6 अरब अमेरिकी डॉलर का था, जिसके वर्ष 2030 तक बढ़कर लगभग 286.1 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। भारत भी इस विकास यात्रा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2025 में देश का मेडिकल टूरिज्म बाजार करीब 8.7 अरब डॉलर आंका गया, जो 2030 तक 16.2 अरब डॉलर तक पहुंचने की संभावना है।
176 देशों से इलाज के लिए पहुंच रहे मरीज
भारत में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए दुनिया के करीब 176 देशों से मरीज पहुंच रहे हैं। वर्ष 2025 में कुल विदेशी पर्यटक आगमन में चिकित्सा उद्देश्य से आने वालों की संख्या 5.07 लाख से अधिक रही। इनमें बांग्लादेश, इराक, उज्बेकिस्तान, सोमालिया, तुर्कमेनिस्तान, ओमान और केन्या जैसे देशों के मरीजों की संख्या प्रमुख रही।
विदेशी मरीज भारत में हृदय सर्जरी, कैंसर उपचार, अंग प्रत्यारोपण, न्यूरोलॉजी, आर्थोपेडिक सर्जरी, कॉस्मेटिक सर्जरी, दंत चिकित्सा और प्रजनन उपचार जैसी अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए आते हैं।
कम खर्च में विश्वस्तरीय इलाज बना ताकत
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की सबसे बड़ी ताकत गुणवत्तापूर्ण इलाज की कम लागत है। विकसित देशों की तुलना में यहां जटिल सर्जरी और उपचार काफी कम खर्च में उपलब्ध हैं। इसके अलावा प्रशिक्षित डॉक्टरों, आधुनिक अस्पतालों और अंतरराष्ट्रीय मानकों ने भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था को वैश्विक पहचान दिलाई है।
मध्य प्रदेश के आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. दीपक रघुवंशी के अनुसार, भारत की चिकित्सा परंपरा सदियों पुरानी है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान और आयुष पद्धतियों के मेल से देश एक ऐसा हेल्थकेयर मॉडल तैयार कर रहा है, जिसमें इलाज के साथ संपूर्ण स्वास्थ्य पर ध्यान दिया जाता है।
आयुष बना भारत की सॉफ्ट पावर
आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी जैसी भारतीय चिकित्सा पद्धतियां भी मेडिकल टूरिज्म को नई दिशा दे रही हैं। सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मरीजों के लिए आयुष वीजा की शुरुआत की है, जिससे विदेशी नागरिकों के लिए भारत में उपचार लेना आसान हुआ है।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत का मॉडल केवल बीमारी के इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि जीवनशैली सुधार और वेलनेस पर भी केंद्रित है। योग और आयुष के माध्यम से भारत दुनिया में अपनी सांस्कृतिक और स्वास्थ्य विरासत को मजबूत कर रहा है।
एम्स से लेकर निजी अस्पतालों तक विदेशी मरीजों की पहुंच
भारत के प्रमुख अस्पताल विदेशी मरीजों के लिए बड़े केंद्र बन चुके हैं। एम्स दिल्ली, पीजीआई चंडीगढ़, टाटा मेमोरियल अस्पताल मुंबई जैसे संस्थानों में कैंसर, लिवर ट्रांसप्लांट और न्यूरोसर्जरी जैसे गंभीर उपचारों के लिए विदेशी मरीज पहुंचते हैं।
वहीं निजी क्षेत्र में अपोलो हॉस्पिटल्स, मेदांता, फोर्टिस, मैक्स, बीएलके-मैक्स, नारायणा हेल्थ, कोकिलाबेन अस्पताल और यशोदा हॉस्पिटल्स जैसे संस्थान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुके हैं।
रोजगार और अर्थव्यवस्था को भी मिल रही नई गति
मेडिकल टूरिज्म केवल स्वास्थ्य क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो रहा है। इससे विदेशी मुद्रा आय, रोजगार के अवसर और निवेश को बढ़ावा मिल रहा है। पर्यटन क्षेत्र का देश की जीडीपी में योगदान भी लगातार बढ़ रहा है।
‘हील इन इंडिया’ से वैश्विक पहचान का लक्ष्य
केंद्र सरकार मेडिकल वैल्यू ट्रैवल को बढ़ावा देने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म, ई-मेडिकल वीजा, विदेशी भाषा प्रशिक्षण और विशेष स्वास्थ्य सेवाओं की सुविधाओं पर काम कर रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में आधुनिक चिकित्सा तकनीक, आयुष की वैश्विक स्वीकार्यता और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के दम पर भारत दुनिया के प्रमुख हेल्थकेयर हब में शामिल हो सकता है। भारत का लक्ष्य अब केवल इलाज देने तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया को समग्र स्वास्थ्य समाधान उपलब्ध कराने का है।