प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पोस्ट के जरिए पृथ्वी माता के महत्व और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने अथर्ववेद के भूमि सूक्त का सुभाषित साझा करते हुए कहा कि धरती वनस्पतियों और औषधियों का आधार है। पीएम ने मातृभूमि की सेवा, सद्गुणों के पालन और मानव कल्याण की भावना को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

नई दिल्ली (Naren Danu) : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार सुबह धरती माता के प्रति सम्मान और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए अथर्ववेद के प्रसिद्ध भूमि सूक्त का स्मरण किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक सुभाषित साझा करते हुए पृथ्वी की सेवा और उसके संरक्षण का संकल्प दोहराया।

प्रधानमंत्री ने अथर्ववेद के काण्ड 12, सूक्त 1, मंत्र 17 से लिया गया श्लोक साझा किया—

"विश्वस्वं मातरमोषधीनां ध्रुवां भूमिं पृथिवीं धर्मणा धृताम्। शिवां स्योनामनु चरेम विश्वहा॥"

इस वैदिक मंत्र में पृथ्वी माता की महिमा का वर्णन करते हुए प्रकृति, वनस्पतियों और औषधियों के संरक्षण का संदेश दिया गया है।

धरती को बताया जीवन का आधार

प्रधानमंत्री की पोस्ट में श्लोक का अर्थ भी साझा किया गया। इसमें कहा गया है कि जिस पृथ्वी पर श्रेष्ठ वनस्पतियां और औषधियां उत्पन्न होती हैं, वह धरती माता सदैव स्थिर और कल्याणकारी बनी रहे।

साथ ही विद्या, शौर्य, सत्य और स्नेह जैसे सद्गुणों से पोषित मातृभूमि की निरंतर सेवा करने का आह्वान किया गया है।

वैदिक परंपरा और पर्यावरण संरक्षण का संदेश

भूमि सूक्त में पृथ्वी को केवल संसाधनों का स्रोत नहीं, बल्कि मां के रूप में सम्मान दिया गया है। प्रधानमंत्री की इस पहल को भारतीय संस्कृति में प्रकृति के प्रति श्रद्धा और पर्यावरण संरक्षण की भावना से जोड़कर देखा जा रहा है।