डीआरआई ने अबूधाबी से लाई गई 1000.20 ग्राम विदेशी सोने की खेप जब्त कर पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया। जांच में खुलासा हुआ कि सोने को चांदी जैसी दिखने वाली चूड़ियों में छिपाकर लाया गया था और एयरपोर्ट कर्मचारी की मदद से कस्टम जांच से बचाने की साजिश रची गई थी। सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

इंदौर (Naren Danu) : देवी अहिल्याबाई होलकर अंतरराष्ट्रीय विमानतल पर सोने की तस्करी के एक बड़े मामले का खुलासा हुआ है। डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (डीआरआई) की जोनल टीम ने करीब 1.28 करोड़ रुपये मूल्य के विदेशी सोने की खेप पकड़ते हुए तस्करी नेटवर्क से जुड़े पांच लोगों को गिरफ्तार किया है।

जांच में सामने आया कि तस्करों ने सोने को छिपाने के लिए बेहद शातिर तरीका अपनाया था। अबूधाबी से लाया गया 1000.20 ग्राम सोना चांदी जैसी दिखने वाली धातु की दो चूड़ियों में छिपाया गया था, ताकि कस्टम जांच में आसानी से बचाया जा सके।

एयरपोर्ट के अंदर से बाहर निकालने की थी साजिश

डीआरआई के मुताबिक, तस्करी की पूरी योजना में एयरपोर्ट के अंदर तैनात एक कर्मचारी की भूमिका भी सामने आई है। आरोप है कि सोने को कस्टम जांच से बचाकर एयरपोर्ट परिसर से बाहर निकालने की तैयारी थी, लेकिन एजेंसी की सतर्कता के चलते यह साजिश सफल नहीं हो सकी।

डीआरआई ने इस मामले में संजय मुंजे (48), अमन गहलोत (30), गोविंद पोरवाल (48), वासुदेव बरनाले (32) और अजय कुमार सेन (56) को गिरफ्तार किया है। सभी आरोपियों को विशेष आर्थिक अपराध न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें 18 अगस्त तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट से पहुंची थी खेप

जांच एजेंसी के अनुसार, 4 अगस्त को एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट IX-248 से अबूधाबी से इंदौर पहुंचे यात्री के माध्यम से विदेशी सोना भारत लाया गया था। सोने का वजन 1000.20 ग्राम है, जिसकी कीमत करीब 1.28 करोड़ रुपये आंकी गई है।

हर आरोपी को दी गई थी अलग जिम्मेदारी

जांच में तस्करी नेटवर्क की भूमिका भी सामने आई है। डीआरआई के अनुसार—

संजय मुंजे पूरे नेटवर्क का मुख्य समन्वयक था और सोना मंगाने की योजना तैयार करता था।
गोविंद पोरवाल अबूधाबी से सोना लेकर आने वाला कैरियर था।
वासुदेव बरनाले, जो एयर इंडिया एक्सप्रेस में कर्मचारी है, पर आरोप है कि वह सोने को कस्टम जांच से पहले बाहर निकालने में मदद करने वाला था।
अमन गहलोत सोना प्राप्त कर आगे पहुंचाने की जिम्मेदारी संभालता था।
अजय कुमार सेन यात्रियों और अन्य आरोपियों के बीच संपर्क सूत्र का काम करता था।
निगरानी की जानकारी के बदले मिलते थे पैसे

डीआरआई की जांच में यह भी पता चला है कि गिरोह से जुड़े लोगों को एयरपोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था और जांच एजेंसियों की गतिविधियों की जानकारी उपलब्ध कराई जाती थी। इसके बदले प्रति यात्रा करीब 10 हजार रुपये भुगतान किए जाने की बात सामने आई है।

पहले भी तस्करी में शामिल होने के संकेत

डीआरआई अधिकारियों के अनुसार, पूछताछ में कई अहम जानकारियां मिली हैं। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि कुछ आरोपी पहले भी विदेशी सोने की तस्करी से जुड़े हो सकते हैं। अब एजेंसी इस नेटवर्क के आर्थिक लेन-देन, फंडिंग, यात्रा मार्ग और अन्य सहयोगियों की भूमिका की जांच कर रही है।

जब्त सोने को सीमा शुल्क अधिनियम के तहत कब्जे में ले लिया गया है। आरोपियों के खिलाफ सीमा शुल्क अधिनियम की धारा 135(1)(a), 135(1)(b) और 135(1)(i)(A) के तहत मामला दर्ज किया गया है।