ब्रिक्स सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने संस्कृति आधारित सतत विकास, क्रिएटिव इकोनॉमी, सांस्कृतिक उद्योगों और विरासत संरक्षण को लेकर विचार साझा किए। बैठक के बाद प्रतिनिधिमंडलों ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय का भ्रमण कर भारत की लोक परंपराओं, जनजातीय संस्कृति और शास्त्रीय कला का अनुभव लिया, जिसने वैश्विक मंच पर भारतीय सांस्कृतिक विरासत की छाप छोड़ी।

भोपाल (Naren Danu) : ब्रिक्स देशों के बीच सांस्कृतिक सहयोग को नई दिशा देने के उद्देश्य से बुधवार को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में BRICS कल्चर वर्किंग ग्रुप की बैठक शुरू हुई। पहले दिन सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने सांस्कृतिक साझेदारी, रचनात्मक अर्थव्यवस्था और विरासत संरक्षण जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा की।

इन मुद्दों पर हुआ फोकस

बैठक में भारत की ओर से तय चार प्रमुख प्राथमिकताओं पर विचार-विमर्श हुआ—

क्रिएटिव इकोनॉमी को बढ़ावा
सांस्कृतिक एवं रचनात्मक उद्योगों का विस्तार
सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण
संस्कृति आधारित सतत विकास
10 देशों की भागीदारी

बैठक में भारत, ब्राजील, चीन, रूस, दक्षिण अफ्रीका, संयुक्त अरब अमीरात, इंडोनेशिया, ईरान और इथियोपिया के प्रतिनिधि प्रत्यक्ष रूप से शामिल हुए, जबकि मिस्र ने हाइब्रिड माध्यम से भागीदारी की। यह बैठक आगामी ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की बैठक की तैयारियों का अहम हिस्सा मानी जा रही है।

'संस्कृति विकास की प्रेरक शक्ति'

उद्घाटन सत्र में केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के सचिव एवं BRICS कल्चर वर्किंग ग्रुप के अध्यक्ष विवेक अग्रवाल ने कहा कि संस्कृति केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि नवाचार, समावेशी विकास और देशों के बीच मजबूत रिश्तों की आधारशिला है।

विदेशी प्रतिनिधियों ने देखा भारत का सांस्कृतिक वैभव

बैठक के बाद प्रतिनिधिमंडलों ने भोपाल स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय का भ्रमण किया। उन्होंने कुम्हार पारा, पारंपरिक तकनीकी उद्यान और हिमालयन विलेज जैसी मुक्ताकाश प्रदर्शनियों का अवलोकन कर भारत की लोक संस्कृति और जनजातीय विरासत की सराहना की।

लोक संस्कृति और शास्त्रीय कला का संगम

सांस्कृतिक संध्या में विदेशी मेहमानों के लिए भारतीय कला की विविध झलकियां पेश की गईं। कार्यक्रम में—

कथक की प्रस्तुतियां 'नवरस', 'काली स्तवन' और 'नर्मदा अष्टपदी'
नागालैंड के चकेसांग नागा कलाकारों के पारंपरिक लोकगीत
राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान (NID MP) की विशेष फैशन प्रस्तुति 'शिखर से तट तक'

ने भारत की सांस्कृतिक विविधता और विरासत को प्रभावशाली ढंग से दुनिया के सामने प्रस्तुत किया।