नई दिल्ली (Naren Danu) : करीब दो वर्ष की चुप्पी तोड़ते हुए बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने बुधवार को पहली बार सार्वजनिक रूप से दुनिया को संबोधित किया। वर्चुअल माध्यम से दिए गए करीब 25 मिनट के संबोधन में उन्होंने साफ कहा कि वह हर हाल में बांग्लादेश लौटेंगी, चाहे उन्हें गिरफ्तार किया जाए या जान का खतरा ही क्यों न हो। उन्होंने संकेत दिया कि उनकी वापसी दिसंबर में हो सकती है।
'सत्ता नहीं, लोकतंत्र के लिए लौटूंगी'
फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब ऑफ साउथ एशिया (एफसीसीएसए) के कार्यक्रम में ऑडियो माध्यम से जुड़े संबोधन में हसीना ने कहा कि उनकी वापसी का उद्देश्य सत्ता हासिल करना नहीं, बल्कि बांग्लादेश में लोकतंत्र, विकास और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों की बहाली है। सुरक्षा कारणों से उन्होंने कैमरा बंद रखा, लेकिन पत्रकारों के सवालों के जवाब भी दिए।
यूनुस सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
हसीना ने अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस को "अवैध" बताते हुए आरोप लगाया कि उनके नेतृत्व में लोकतांत्रिक संस्थाएं कमजोर हुई हैं, अवामी लीग के नेताओं और कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जा रहा है और देश को अस्थिरता की ओर धकेला जा रहा है।
'जेल या मौत से नहीं डरती'
पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित हैं। उन्होंने कहा, "अगर मुझे जेल भेज दिया जाए या मेरी हत्या भी कर दी जाए, तब भी मैं अपने देश लौटूंगी। डर मेरे फैसले तय नहीं कर सकता।"
2024 के आंदोलन पर उठाए सवाल
हसीना ने जुलाई-अगस्त 2024 के छात्र आंदोलन को स्वतःस्फूर्त आंदोलन मानने से इनकार किया। उनका दावा था कि यह एक सुनियोजित राजनीतिक अभियान था, जिसका उद्देश्य लोकतांत्रिक प्रक्रिया के बजाय दूसरे रास्ते से सत्ता परिवर्तन करना था। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन के दौरान पुलिस थानों और सरकारी संस्थानों पर हमले किए गए तथा कई सुरक्षाकर्मियों की हत्या हुई।
'देश में भय और प्रतिशोध का माहौल'
अपने संबोधन में उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा शासन में अवामी लीग नेताओं की हत्याएं, गिरफ्तारियां और कथित तौर पर जबरन गायब किए जाने की घटनाएं बढ़ी हैं। उन्होंने दावा किया कि हजारों लोग मारे गए या लापता हैं और बड़ी संख्या में लोगों को मुकदमों में आरोपी बनाया गया है। साथ ही अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर भी चिंता जताई।
भारत को बताया भरोसेमंद मित्र
भारत-बांग्लादेश संबंधों पर बोलते हुए शेख हसीना ने कहा कि 1971 के मुक्ति संग्राम से लेकर आज तक भारत ने हर कठिन समय में बांग्लादेश का साथ दिया है। उन्होंने कहा कि सरकारें बदल सकती हैं, लेकिन दोनों देशों की जनता के बीच दोस्ती कायम रहनी चाहिए।
सजीब वाजेद ने भी उठाए सवाल
कार्यक्रम में मौजूद हसीना के पुत्र सजीब वाजेद ने भी बांग्लादेश की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने दावा किया कि अगस्त 2024 के बाद बड़ी संख्या में लोगों को बिना मुकदमे के हिरासत में रखा गया है और आंदोलन के दौरान हुई मौतों के आधिकारिक आंकड़ों पर भी सवाल उठाए।
निर्वासन से वापसी की तैयारी
गौरतलब है कि अगस्त 2024 में छात्र आंदोलन के बाद सत्ता परिवर्तन होने पर शेख हसीना को देश छोड़ना पड़ा था और तब से वह भारत में रह रही हैं। उनके खिलाफ बांग्लादेश में कई कानूनी मामले लंबित हैं और एक विशेष न्यायाधिकरण उन्हें अनुपस्थिति में सजा भी सुना चुका है। इसके बावजूद उन्होंने कहा कि वह अपने देश लौटने के फैसले से पीछे नहीं हटेंगी।