वार्ड नंबर-5 के मेन बाजार में नगर परिषद की सड़क बंद होने से स्थानीय लोगों और दुकानदारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। निवासियों का आरोप है कि सार्वजनिक मार्ग पर निजी ताला लगाकर रास्ता रोका गया है। लोगों ने प्रशासन से जांच कर ताला हटाने, अतिक्रमण की कार्रवाई करने और सड़क को आम जनता के लिए खोलने की मांग की है।

जीरकपुर : जीरकपुर के बलटाना मेन बाजार स्थित वार्ड नंबर-5 में एक सरकारी सड़क पर पिछले करीब दो वर्षों से निजी ताला लगाए जाने का मामला सामने आया है। स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया है कि नगर परिषद के अधीन आने वाले सार्वजनिक मार्ग को एक व्यक्ति ने निजी ताला लगाकर बंद कर रखा है, जिससे आम लोगों की आवाजाही पूरी तरह प्रभावित हो गई है।

स्थानीय निवासी सुरेंद्र कुमार, रजत शर्मा, संजीव धीमान, मनजीत सिंह, रमेश कुमार और सुल्तान सिंह ने बताया कि यह सड़क मेन बाजार में स्थित शोरूमों के पीछे से गुजरती है। नगर परिषद द्वारा इस मार्ग पर इंटरलॉकिंग टाइल्स बिछाई गई थीं और दोनों सिरों पर सुरक्षा गेट भी लगाए गए थे ताकि लोग सुविधा से इसका उपयोग कर सकें। आरोप है कि एक गेट पर निजी ताला लगाकर रास्ता बंद कर दिया गया, जिसके चलते पिछले दो वर्षों से आम जनता इस सड़क का उपयोग नहीं कर पा रही है।

निवासियों का कहना है कि शाम के समय बलटाना मेन बाजार में भारी ट्रैफिक जाम लगता है। यदि यह सड़क खोल दी जाए तो वाहन चालकों और पैदल राहगीरों को एक वैकल्पिक मार्ग मिल सकता है, जिससे मुख्य सड़क पर ट्रैफिक का दबाव काफी कम हो जाएगा। फिलहाल रास्ता बंद होने के कारण पूरा यातायात मुख्य मार्ग पर ही निर्भर है।

लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि सड़क से सटे एक निजी रेस्टोरेंट की पिछली तरफ कथित रूप से अवैध अतिक्रमण किया गया है, जिससे सार्वजनिक मार्ग और अधिक प्रभावित हुआ है। उनका कहना है कि सार्वजनिक भूमि पर कब्जे और सड़क बंद होने की जानकारी प्रशासन को होने के बावजूद अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।

क्षेत्रवासियों ने नगर परिषद जीरकपुर, स्थानीय वार्ड पार्षद और जिला प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि सड़क सार्वजनिक संपत्ति है तो उस पर लगाया गया निजी ताला तत्काल हटाकर आम लोगों के लिए मार्ग बहाल किया जाए। साथ ही कथित अतिक्रमण की भी जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

फिलहाल इस मुद्दे को लेकर स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है। अब सभी की निगाहें नगर परिषद और प्रशासन पर टिकी हैं कि सार्वजनिक सड़क से निजी ताला हटाकर लोगों को उनका अधिकार वापस दिलाया जाता है या नहीं।