अनुच्छेद 370 हटने की सातवीं वर्षगांठ पर सियासी घमासान तेज हो गया है। पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती के विरोध प्रदर्शन पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने निशाना साधते हुए उन पर आतंकवादियों का समर्थन करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि 5 अगस्त 2019 का फैसला देश में एक राष्ट्र, एक संविधान और एक झंडे की भावना को मजबूत करने वाला कदम था।

नई दिल्ली (Naren Danu) : जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने की सातवीं वर्षगांठ से पहले सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने पीडीपी प्रमुख और जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के विरोध प्रदर्शन को लेकर कड़ा हमला बोला है। उन्होंने संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान महबूबा मुफ्ती पर आतंकवादियों के प्रति नरम रुख अपनाने का आरोप लगाया।

'आतंकियों के साथ खड़ी रहीं महबूबा'

गिरिराज सिंह ने आरोप लगाया कि महबूबा मुफ्ती लंबे समय तक आतंकवादियों के पक्ष में खड़ी रहीं। उन्होंने कहा कि एक समय भाजपा ने उनकी पार्टी के साथ मिलकर सरकार चलाई थी और उन्हें मुख्यधारा की राजनीति में आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया, लेकिन परिस्थितियां अनुकूल नहीं रहने पर गठबंधन समाप्त करना पड़ा।

5 अगस्त को बताया ऐतिहासिक दिन

केंद्रीय मंत्री ने पांच अगस्त को देश के लिए ऐतिहासिक तारीख बताते हुए कहा कि जिस तरह 15 अगस्त और 26 जनवरी का महत्व है, उसी तरह अनुच्छेद 370 हटाने का दिन भी राष्ट्रीय महत्व रखता है। उन्होंने कहा कि यह फैसला देश की एकता और अखंडता को मजबूत करने वाला कदम था।

'एक राष्ट्र, एक संविधान' व्यवस्था मजबूत हुई

गिरिराज सिंह ने कहा कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर पूरी तरह देश की मुख्यधारा से जुड़ा है। उन्होंने दावा किया कि इस फैसले से ‘एक राष्ट्र, एक झंडा, एक प्रधानमंत्री और एक संविधान’ की भावना को मजबूती मिली है।

2019 में हुआ था बड़ा संवैधानिक बदलाव

गौरतलब है कि 5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निष्प्रभावी कर दिया था। इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के तहत तत्कालीन राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों—जम्मू-कश्मीर और लद्दाख—में विभाजित किया गया था।

भाजपा जश्न, क्षेत्रीय दलों का विरोध

अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से भाजपा और केंद्र समर्थक संगठन इस दिन को ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में मनाते हैं, जबकि पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस समेत कई क्षेत्रीय दल इस फैसले का विरोध करते रहे हैं। इसी क्रम में महबूबा मुफ्ती ने बरसी की पूर्व संध्या पर विरोध प्रदर्शन किया।