प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार को लुधियाना और चंडीगढ़ में एक साथ कार्रवाई करते हुए PSIDC कार्यालय और एक कथित बिचौलिए से जुड़े ठिकानों पर जांच की। सूत्रों के अनुसार टीम औद्योगिक प्लॉटों के आवंटन और खरीद-फरोख्त से जुड़े दस्तावेज खंगाल रही है। हालांकि, ईडी ने कार्रवाई के संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।

लुधियाना : मंगलवार को ईडी (इंन्फोस्मेंट डायरेक्टोरेट) की और से लुधियाना और चंडीगढ़ में एक साथ कार्रवाई की गई। इस दौरान टीम द्वारा लुधियाना के अति पॉश अपार्टमेंट में से एक पक्खोवाल रोड स्थित सेंट्रा ग्रीन्स के द मलबरी टू बिल्डिंग में दबिश दी गई। सेंट्रा ग्रीन्स में रेड का कारण फ्लैट नंबर 901 में रहते दमनदीप सिंह नामक बिचौलिया बताया जा रहा है। इसी के साथ साथ चंडीगढ़ के सेक्टर-17 में स्थित उद्योग भवन के पीएसआईडीसी (पंजाब कोर इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट कॉर्प) में भी रेड की। चर्चा है कि यह रेड पीएसआईडीसी डिपार्टमेंट में प्रॉपर्टियों की सेल परचेज में हेरफेर होने की आशंका के चलते हुई है। देर रात तक यह जांच जारी रही।

हालांकि इस मामले संबंधी अभी ईडी की और से कोई आधिकारिक रुप से खुलासा नहीं किया गया है। लेकिन चर्चा है कि टीम द्वारा कई अहम सबूत मिलने के बाद ही एक्शन लिया है। हालांकि इस रेड के बाद सेंट्रा ग्रीन्स से लेकर चंडीगढ़ उद्योग भवन तक हलचल मची हुई है। पूरा दिन दोनों स्थानों पर हड़कंप का माहौल रहा। बताया जा रहा है कि यह रेड दिल्ली से आई ईडी की टीमों द्वारा की गई है। जैसे ही ईडी की टीमें सरकारी बिल्डिंग में घुसी तो उसके बाद सभी को बाहर और अंदर आने जाने पर रोक लगा दी गई। पीएसआईडीसी के मैनेजिंग डायरेक्टर आईएएस अधिकारी रूबिंदरजीत सिंह बराड़ द्वारा इस रेड की पुष्टि की है।

पीएसआईडीसी के प्लॉटों का डाटा खंगाल रही टीमें
चर्चा है कि टीम द्वारा पीएसआईडीसी द्वारा अलॉट किए प्लॉटों का डाटा इकट्‌ठा किया जा रहा है। जिसमें आशंका है कि नियमों का उल्लंघन करके यह अलॉटमेंट की गई है। इसी के साथ साथ कई कारोबारियों को अवैध तरीके से फायदा पहुंचाया गया है। जिसके चलते टीमों द्वारा नया और पुराना दोनों रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। आशंका है कि इस कार्रवाई के बाद कई अहम खुलासे हो सकते हैं।

कुछ समय पहले लग्जरी अपार्टमेंट में शिफ्ट हुआ दमनदीप सिंह
चर्चा है कि सेंट्रा ग्रीन्स के द मलबरी टू अपार्टमेंट के फ्लैट नंबर 901 में दमनदीप सिंह पुत्र अवतार सिंह नामक व्यक्ति रहता है। उसी के नाम से वारंट लेकर टीम रेड करने पहुंची थी। चर्चा है कि वे पहले मॉडल टाउन में रहता था। लेकिन कुछ समय पहले उसने वहां घर बेचकर सेंट्रा ग्रीन्स के अति लग्जरी अपार्टमेंट मानें जाते द मलबरी टू की बिल्डिंग में रहता था। हालांकि टीमों ने पहले मॉडल टाउन में दबिश दी। लेकिन फिर धीरे धीरे सेंट्रा ग्रीन्स में पहुंची। हालांकि वहां फ्लैट पर ताला लगा मिला। जिसके बाद टीम को वापिस लौटना पड़ा। अब टीमें उसकी तलाश कर रही है।

बिचौलिए की भूमिका निभा रहा था सेंट्रा ग्रीन्स का रेजिडेंट
चर्चा है कि दमनदीप सिंह का पीएसआईडीसी (पंजाब कोर इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट कॉर्प) के अधिकारियों के साथ अच्छा संपर्क था। चर्चा है कि दमनदीप सिंह द्वारा पीएसआईडीसी के प्लॉटों की सेल परचेज में बिचौलिए का रोल अदा किया जा रहा था। उसकी तरफ से कई लोगों को प्लॉट दिलाए गए। आशंका है कि इन प्लॉटों की सेल में भी कई अनियमिताएं पाई गई है। जिसके चलते ईडी द्वारा दमनदीप की तलाश की जा रही है। उसके मिलने के बाद कई राज से पर्दा उठने की संभावना जताई जा रही है।

दो दिन पहले स्कैम हुआ था उजागर
चर्चा है कि पीएसआईडीसी डिपार्टमेंट में एक बड़ा स्कैम पकड़ा गया था। दो दिन पहले ही इसका खुलासा हुआ था। इस स्कैम के खुलासे के बाद कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। यह मुद्दा इतना गंभीर था कि एक अधिकारी अंकुर चौधरी को चार्जशीट भी किया गया था। मैनेजिंग डायरेक्टर रूबिंदरजीत सिंह बराड़ ने भी इसकी पुष्टि की है।

पूर्व मंत्री अरोड़ा ने दिलाई थी इंडस्ट्री को राहत
बता दें कि ईडी की रेड के बाद कई लोगों द्वारा इस कार्रवाई को पूर्व इंडस्ट्री मिनिस्टर संजीव अरोड़ा के साथ जोड़ा जा रहा था। हालांकि अभी तक उन्हें लेकर कोई जांच होने की बात ऑफिशियल तौर पर सामने नहीं आई है। यह नहीं कहा जा सकता है कि भविषय में उनसे तार जुड़ेगें या नहीं। वहीं उद्योग भवन में इंडस्ट्री मंत्री का ऑफिस होने के चलते अरोड़ा का नाम चर्चाओं में आने की बात कही जा रही है। इस रेड के बाद यह चर्चा फिर से छिड़ गई कि मंत्री रहते हुए संजीव अरोड़ा द्वारा उद्योग के 35 साल पुराने रोग को खत्म कर पीएसआईडीसी डिपार्टमेंट से बड़ी राहत दिलाई थी। विभाग उस मामले की भी बारिकी से जांच कर रहा है।

ईडी से किया जा रहा सहयोग
वहीं पंजाब कोर इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट कॉर्प के मैनेजिंग डायरेक्टर (एमडी) रूबिंदरजीत सिंह बराड़ का कहना है कि ईडी की टीमें जांच करने के लिए पहुंची है। उनके द्वारा डाटा चैक किया जा रहा है। टीमों के साथ हर प्रकार से सहयोग किया जा रहा है।