नई कार्यकारिणी के गठन के बाद पंजाब भाजपा में असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। जिला अध्यक्षों में बदलाव, संगठनात्मक नियुक्तियों और कार्यशैली को लेकर कई नेताओं ने विरोध जताया है। कुछ नेताओं ने संगठन पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जबकि कई पदाधिकारियों ने इस्तीफे की घोषणा कर दी। पार्टी के भीतर बढ़ती गुटबाजी को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

लुधियाना : पंजाब भाजपा की नई कार्यकारिणी के गठन से के बाद पार्टी के भीतर बड़ा घमासान पैदा हो गया है। नई नियुक्तियों को लेकर शुरू हुआ विवाद अब खुले विरोध, इस्तीफों और नेतृत्व पर सवालों तक पहुंच गया है। पार्टी के अंदर चल रही गुटबाजी को लेकर कई नेताओं का कहना है कि पंजाब भाजपा का "कांग्रेसीकरण" हो गया है। हालत ऐसे है कई नेताओं ने पंजाब के संगठन मंत्री पर सोशल मिडिया के जरिए बड़े गंभीर वित्तीय आरोप जड़ दिए है। नई कार्यकारणी में कुछ चेहरों को दी गई बड़ी जिम्मेवारियों को गत समय में हुए वित्तीय घोटालों से प्रभावित होने की चर्चाएं गर्म है।

चर्चाओं की माने तो प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने भाजपा के राष्ट्रिय अध्यक्ष नितिन नवीन को पत्र लिखकर नई कार्यकारिणी के गठन के लिए उन्हें विश्वास में ना लिए जाने की बात तक कह डाली है। वही नई कमेटी में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अश्वनी शर्मा के समर्थकों को किनारे किए जाने की भी चर्चाएं गर्म है।

पार्टी के भीतर चर्चा है कि संगठन महामंत्री मंत्री श्रीनिवासुलु ने अपनी मर्जी से कार्यकारिणी का गठन किया, जिससे वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं में नाराजगी बढ़ गई है। राजनीतिक हलकों में इसे लेकर यह टिप्पणी भी की जा रही है कि जिस गुटबाजी के लिए कांग्रेस अक्सर चर्चा में रहती थी, अब वैसा ही "कांग्रेसीकरण" पंजाब भाजपा में भी देखने को मिल रहा है। वही नई कार्यकारणी में संगठन मंत्री द्वारा वित्तीय गड़बड़ियों की मैनेजमेंट के उद्देश्य से कइयों को बाहर करने और कइयों को बड़ी जिम्मेवारी सौंपने की भी निरंतर चर्चाएं है।

विवाद उस समय और गहरा गया जब महज 15 दिनों के भीतर 6 जिला अध्यक्षों को बदल दिया गया। पार्टी के कई नेताओं का कहना है कि यह पहली बार है जब जिला अध्यक्षों की नियुक्ति के कुछ ही दिनों बाद बदलाव करना पड़ा। साथ ही यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि संगठन महामंत्री श्रीनिवासुलु ने सीधे अपनी पसंद के अनुसार टीम की घोषणा की, जबकि प्रदेश नेतृत्व और स्थानीय नेताओं को विश्वास में नहीं लिया गया।

इस बीच होशियारपुर में जिला अध्यक्ष सतीश बावा को हटाकर नितिन गुप्ता 'नन्नू' की नियुक्ति के बाद विरोध में बावा का आत्म हत्या करने का मामला सोशल मिडिया पर पार्टी की छवि बिगड़ रहा है । पूर्व मंत्री तीक्ष्ण सूद और उनके समर्थकों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर संगठनात्मक पदों से इस्तीफे की घोषणा कर दी। हालांकि उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता बरकरार रखने की बात कही। उनके साथ 111 पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने भी अपने संगठनात्मक पद छोड़ने की घोषणा की।

तीक्ष्ण सूद ने आरोप लगाया कि स्थानीय कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं की राय को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया। उनका कहना था कि जिला स्तर पर उठाए जा रहे मुद्दों को प्रदेश नेतृत्व गंभीरता से नहीं सुन रहा।

उधर, भाजपा के वरिष्ठ नेता सुखमिंदरपाल सिंह ग्रेवाल ने भी 34 वर्षों के लंबे जुड़ाव के बाद पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। अपने बयान में उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में समर्पित और वैचारिक कार्यकर्ताओं की उपेक्षा हो रही है, जबकि पक्षपात की संस्कृति बढ़ती जा रही है।

17 दिन में बदले गए संगरूर के प्रधान मनिंदर सिंह ने भी सार्वजनिक रूप से पंजाब भाजपा संगठन मंत्री की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए नाराजगी जाहिर की है। उनका आरोप है कि वे संगठन मंत्री को बड़े धन्ना सेठो की तरह खुश नहीं कर पाए इसीलिए पार्टी के फैसले एकतरफा लिए जा रहे हैं और जमीनी कार्यकर्ताओं की राय को महत्व नहीं दिया जा रहा।

चर्चा अनुसार बढ़ते विवाद के बीच प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों दिल्ली पहुंचे और उन्होंने केंद्रीय नेतृत्व से नई कार्यकारिणी को लेकर पार्टी और संगठन में बढ़ते असंतोष से अवगत करवाया हैं।

हालांकि, भाजपा की ओर से इन आरोपों और अंदरूनी असंतोष पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन लगातार सामने आ रहे विरोध, इस्तीफों और नेताओं के बयानों ने पंजाब भाजपा के भीतर बढ़ती गुटबाजी और कथित "कांग्रेसीकरण" को लेकर राजनीतिक चर्चाओं को तेज कर दिया है।