हल्की बारिश के बाद रोज गार्डन में अचानक जमीन धंसने से अफरा-तफरी मच गई। घटना के समय एक महिला महज पांच फुट की दूरी पर थी और बड़ा हादसा टल गया। जिस स्थान पर पहले वाटर व सीवरेज पाइपलाइन बिछाई गई थी, वहां मिट्टी भराई और गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। नगर निगम से पूरे क्षेत्र की तकनीकी जांच कराने की मांग तेज हो गई है।

लुधियाना (नवीन गोगना) : शहर के प्रसिद्ध नेहरू रोज गार्डन में जरा-सी बारिश के बाद जमीन धंसने की घटना ने हड़कंप मचा दिया। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जिस समय जमीन धंसी, एक महिला वहां से गुजर रही थी और घटनास्थल से उसकी दूरी महज करीब 5 फुट बताई जा रही है। गनीमत रही कि महिला कुछ कदम पीछे थी, अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था।

चश्मदीदों के मुताबिक अचानक जमीन धंसने से वहां मौजूद लोग भी सहम गए। घटना के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि आखिर रोज गार्डन जैसे सार्वजनिक और व्यस्त स्थान पर जमीन इस तरह धंसी कैसे?

पाइपलाइन बिछी, लेकिन मिट्टी सही ढंग से दबाई गई या नहीं?

पता चला है कि कुछ समय पहले एक निजी कंपनी की ओर से रोज गार्डन के इस हिस्से में बड़े आकार की वाटर एवं सीवरेज पाइपलाइन बिछाई गई थी। इसके लिए जमीन की खुदाई की गई और पाइप डालने के बाद मिट्टी भर दी गई।

अब बारिश के बाद उसी इलाके में जमीन धंसने से काम की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। चश्मदीदों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि पाइपलाइन डालने के बाद मिट्टी को सही तरीके से दबाया नहीं गया, जिसके चलते बारिश पड़ते ही मिट्टी बैठ गई और जमीन धंस गई।

हालांकि इस आरोप की संबंधित कंपनी अथवा नगर निगम की ओर से आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।

कंपनी ने काम किया तो निगम के अधिकारी कहां थे?

घटना ने निजी कंपनी के साथ-साथ नगर निगम के वाटर एंड सीवरेज विभाग की निगरानी व्यवस्था को भी सवालों के घेरे में ला दिया है।

सवाल यह है कि जब पाइपलाइन बिछाने का काम पूरा हुआ तो क्या नगर निगम के संबंधित अधिकारियों ने मौके पर जाकर इसकी जांच की थी? क्या यह देखा गया कि पाइपलाइन के ऊपर डाली गई मिट्टी को निर्धारित तरीके से दबाया गया है? और क्या जमीन को लोगों के इस्तेमाल के लिए सुरक्षित घोषित करने से पहले उसकी मजबूती जांची गई थी?

अगर जांच हुई थी तो फिर जरा-सी बारिश में जमीन कैसे धंस गई?

भगवान न करे... सुबह सैर के समय होता हादसा तो कौन देता जवाब?

नेहरू रोज गार्डन में रोजाना सुबह बड़ी संख्या में बुजुर्ग, महिलाएं, बच्चे और अन्य लोग सैर करने पहुंचते हैं। ऐसे में लोगों का सवाल है कि यदि यही घटना सुबह की सैर के व्यस्त समय में होती और कोई व्यक्ति धंसी हुई जमीन में गिर जाता तो जिम्मेदारी आखिर किसकी तय होती?

निजी कंपनी की...?
नगर निगम की...?
या फिर हादसे के बाद जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति होती?

इस घटना में कोई जानी नुकसान नहीं हुआ, लेकिन महज 5 फुट की दूरी से सुरक्षित निकली महिला ने व्यवस्था के सामने बड़ा सवाल जरूर छोड़ दिया है।

एक जगह धंसी जमीन, बाकी हिस्सा कितना सुरक्षित?

अब जरूरत सिर्फ धंसी हुई जगह पर मिट्टी डालकर मामला खत्म करने की नहीं, बल्कि उस पूरे हिस्से की तकनीकी जांच करवाने की है जहां पाइपलाइन बिछाई गई थी।

कहीं जमीन के नीचे दूसरी जगहों पर भी मिट्टी खोखली तो नहीं हो चुकी? कहीं अगली बारिश में रोज गार्डन के किसी दूसरे हिस्से की जमीन तो नहीं धंस जाएगी?

शहरवासियों की सुरक्षा को देखते हुए नगर निगम प्रशासन के लिए इन सवालों का जवाब तलाशना बेहद जरूरी है।

बाल-बाल बची महिला, मगर घटना दे गई बड़ी चेतावनी

फिलहाल गनीमत यही रही कि कोई व्यक्ति धंसी जमीन की चपेट में नहीं आया। लेकिन रोज गार्डन की यह घटना संबंधित कंपनी और नगर निगम के लिए किसी बड़ी चेतावनी से कम नहीं है।

सवाल सीधा है—क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है, या समय रहते पूरे इलाके की जांच कर लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी?