लुधियाना (नवीन गोगना) : पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान द्वारा लुधियाना में सरकारी स्कूलों के उद्घाटन के बाद अब समारोह में शहर की मेयर और लुधियाना इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट के चेयरमैन को मिले प्रतिनिधित्व को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। मामला इसलिए महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि जिन स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित किए गए, उनकी जमीन के स्वामित्व को लेकर नगर निगम और लुधियाना इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट का संबंध होने का दावा किया जा रहा है।
उद्घाटन स्थल पर लगाए गए शिलापट्ट पर मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान, शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस, स्थानीय विधायक अशोक पराशर पप्पी सहित वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के नाम अंकित दिखाई देते हैं, लेकिन संबंधित जमीन यदि लुधियाना इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट की है तो शिलापट्ट पर ट्रस्ट चेयरमैन का नाम नहीं होना सवाल खड़ा करता है। इसी तरह शहर की निर्वाचित मेयर को कार्यक्रम में मिले स्थान को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।
मुख्यमंत्री के स्वागत के लिए पहुंचीं मेयर, फिर फोटो सेशन में क्यों नहीं?
दिलचस्प पहलू यह है कि मेयर कार्यक्रम से पूरी तरह गैरहाजिर नहीं थीं। उपलब्ध तस्वीर में वह मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान का फूलों का गुलदस्ता देकर स्वागत करती दिखाई देती हैं। यानी उनकी कार्यक्रम में मौजूदगी स्पष्ट है।
इसके बावजूद कार्यक्रम के प्रमुख सामूहिक फोटो सेशन में मेयर नजर नहीं आतीं। ऐसे में सवाल यह है कि मुख्यमंत्री का स्वागत करने के बाद ऐसा क्या हुआ कि शहर की प्रथम नागरिक मुख्य फोटो सेशन का हिस्सा नहीं रहीं?
सूत्रों के मुताबिक, उद्घाटन शिलापट्ट पर अपना नाम नहीं देखकर मेयर कथित तौर पर कुछ ही समय बाद कार्यक्रम स्थल से चली गईं। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि मेयर, जिला प्रशासन अथवा सरकार की ओर से सामने आना बाकी है। इसलिए यह स्पष्ट होना जरूरी है कि उनका जल्दी चले जाना पूर्व निर्धारित कार्यक्रम का हिस्सा था या इसके पीछे कोई अन्य कारण था।
आम घर की बेटी को मेयर बनाने का दावा, फिर कार्यक्रम में प्रतिनिधित्व पर सवाल
मेयर के चयन के समय आम आदमी पार्टी की ओर से इसे आम परिवारों को सत्ता और व्यवस्था में प्रतिनिधित्व मिलने के उदाहरण के तौर पर पेश किया गया था। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान भी आम घरों से आए लोगों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दिए जाने की बात करते रहे हैं।
ऐसे में उसी सरकार के मुख्यमंत्री की मौजूदगी वाले बड़े सरकारी कार्यक्रम में शहर की निर्वाचित मेयर को अपेक्षित प्रतिनिधित्व मिला या नहीं, यह सवाल राजनीतिक महत्व भी रखता है। खासकर तब, जब वह मुख्यमंत्री के स्वागत के लिए कार्यक्रम में मौजूद थीं लेकिन बाद के प्रमुख फोटो सेशन में दिखाई नहीं दीं।
ट्रस्ट की जमीन थी तो चेयरमैन की भूमिका क्या थी?
इस पूरे घटनाक्रम का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू लुधियाना इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट से जुड़ा है। संबंधित स्कूल की जमीन ट्रस्ट की होने का दावा किया जा रहा है। यदि आधिकारिक राजस्व एवं संपत्ति रिकॉर्ड भी इसकी पुष्टि करता है, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि ट्रस्ट की जमीन पर बने स्कूल के उद्घाटन समारोह में ट्रस्ट चेयरमैन की आधिकारिक भूमिका क्या निर्धारित की गई थी?
यदि जमीन ट्रस्ट के स्वामित्व की थी तो क्या ट्रस्ट चेयरमैन को आधिकारिक रूप से समारोह में आमंत्रित किया गया था? यदि किया गया था तो शिलापट्ट पर उनका नाम शामिल न करने का आधार क्या था?
यही सवाल दूसरे स्कूल की जमीन के संबंध में भी उठता है। जमीन का वास्तविक मालिकाना रिकॉर्ड सामने आने से स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है।
नाम लिखना अनिवार्य नहीं, लेकिन चयन का आधार क्या?
यहां यह तथ्य भी महत्वपूर्ण है कि किसी सरकारी स्कूल के प्रत्येक उद्घाटन शिलापट्ट पर संबंधित मेयर या इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट चेयरमैन का नाम अंकित करना अनिवार्य होने का कोई सामान्य नियम उपलब्ध जानकारी से स्थापित नहीं होता।
इसलिए विवाद का केंद्र यह नहीं होना चाहिए कि उनका नाम लिखना कानूनन अनिवार्य था। बड़ा सवाल नामों के चयन के आधार का है।
जब शिलापट्ट पर मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, स्थानीय विधायक और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को स्थान दिया गया, तो संबंधित स्थानीय निकाय अथवा जमीन की मालिक संस्था के प्रमुख को स्थान देने या न देने का प्रशासनिक आधार क्या था?
प्रोटोकॉल और प्रतिनिधित्व पर प्रशासन को स्थिति करनी चाहिए स्पष्ट
मेयर को आम तौर पर शहर की ‘प्रथम नागरिक’ के रूप में संबोधित किया जाता है, जबकि इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट का चेयरमैन ट्रस्ट का प्रमुख होता है। इसलिए इस मामले को केवल शिलापट्ट पर नाम नहीं होने तक सीमित करके देखना पर्याप्त नहीं होगा। यह स्थानीय निर्वाचित संस्था और संबंधित सरकारी निकाय को मुख्यमंत्री स्तर के कार्यक्रम में मिले प्रतिनिधित्व का भी सवाल है।
अब जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग, नगर निगम और लुधियाना इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट की ओर से यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि दोनों स्कूलों की जमीन का वास्तविक मालिकाना रिकॉर्ड किस संस्था के नाम है, कार्यक्रम की आधिकारिक अतिथि सूची क्या थी, मेयर और ट्रस्ट चेयरमैन को किस हैसियत से आमंत्रित किया गया था और शिलापट्ट पर नाम शामिल करने का मानदंड किसने तय किया था।
इन तथ्यों के सामने आने के बाद ही निष्पक्ष रूप से तय किया जा सकेगा कि यह सामान्य प्रशासनिक व्यवस्था थी, प्रोटोकॉल संबंधी कोई चूक थी या वास्तव में शहर की प्रथम नागरिक और संबंधित ट्रस्ट के प्रमुख को अपेक्षित प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया।
सरकार से सीधा सवाल
यदि स्कूल की जमीन लुधियाना इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट की थी तो शिलापट्ट पर ट्रस्ट चेयरमैन का नाम क्यों नहीं था? और जब मेयर स्वयं मुख्यमंत्री का स्वागत करने कार्यक्रम में पहुंची थीं, तो वह प्रमुख आधिकारिक फोटो सेशन में क्यों नजर नहीं आईं? सरकार और प्रशासन को इन सवालों पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।