गुवाहाटी (Naren Danu) : असम में बाढ़ की त्रासदी अभी थमी नहीं है। लगातार बारिश और उफनती नदियों ने राज्य के कई हिस्सों में जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर रखा है। ताजा स्थिति के अनुसार राज्य के पांच जिलों में 1.36 लाख से अधिक लोग अब भी बाढ़ की मार झेल रहे हैं। इस बीच तीन और शव बरामद होने के बाद बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 85 हो गई है, जबकि कई इलाकों में हालात अब भी चिंताजनक बने हुए हैं।
सबसे अधिक तबाही ऊपरी असम के शिवसागर, चराईदेव, जोरहाट और गोलाघाट जिलों में देखने को मिली है। इनमें शिवसागर सबसे ज्यादा प्रभावित जिला बनकर उभरा है, जहां बाढ़ का दर्द अब भी लोगों के चेहरों पर साफ दिखाई दे रहा है। कई परिवार बेघर हो चुके हैं और सामान्य जनजीवन पूरी तरह पटरी से नहीं लौट पाया है।
मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा दो अगस्त से चार दिवसीय ऊपरी असम दौरे पर हैं। मुख्यमंत्री स्वयं बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर राहत एवं पुनर्वास कार्यों की समीक्षा कर रहे हैं। राज्य सरकार के मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी भी विभिन्न इलाकों में राहत कार्यों की निगरानी करते हुए प्रभावित परिवारों तक त्वरित सहायता पहुंचाने में जुटे हैं।
धनसिरि नदी अब भी खतरे के निशान से ऊपर
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) के ताजा आंकड़ों के अनुसार नुमलीगढ़ क्षेत्र में धनसिरि नदी अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। रविवार को शिवसागर जिले से तीन और शव बरामद किए गए, जबकि जिले में दो लोगों के अब भी लापता होने की जानकारी दी गई है। प्रशासन लगातार खोज एवं बचाव अभियान चला रहा है।
335 गांव जलमग्न, 15 हजार हेक्टेयर से ज्यादा फसल बर्बाद
बाढ़ की चपेट में आए गोलाघाट, जोरहाट, शिवसागर, चराईदेव और धेमाजी जिलों के 21 राजस्व मंडलों के 335 गांव प्रभावित हैं। इन क्षेत्रों की 1,36,203 आबादी बाढ़ से जूझ रही है, जबकि 15,422 हेक्टेयर कृषि भूमि अब भी पानी में डूबी हुई है। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
39 राहत शिविरों में हजारों लोगों को मिला सहारा
राज्य सरकार ने प्रभावितों की सहायता के लिए 39 राहत शिविर और 15 राहत वितरण केंद्र स्थापित किए हैं। इन राहत शिविरों में 10,844 लोग फिलहाल शरण लिए हुए हैं। प्रशासन भोजन, पेयजल, दवाइयों और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने में जुटा हुआ है।
सड़क, पुल और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान
बाढ़ ने केवल जनजीवन ही नहीं, बल्कि राज्य के बुनियादी ढांचे को भी व्यापक नुकसान पहुंचाया है। कई सड़कें, पुल और सार्वजनिक निर्माण क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जिससे राहत एवं बचाव कार्यों के साथ-साथ आवागमन भी प्रभावित हुआ है। प्रशासन हालात सामान्य करने के लिए युद्धस्तर पर काम कर रहा है।