श्रावण मास के पहले सोमवार उज्जैन में भगवान महाकाल की पहली शाही सवारी चंद्रमौलेश्वर स्वरूप में निकलेगी। महाकाल मंदिर से शुरू होकर रामघाट तक पहुंचने वाली सवारी में शिप्रा जल से अभिषेक, हरि-हर मिलन और महाआरती होगी। तड़के भस्म आरती के साथ भगवान का भव्य श्रृंगार किया गया। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और स्वास्थ्य के व्यापक इंतजाम किए हैं।

उज्जैन (Naren Danu) : श्रावण मास के पहले सोमवार पर धर्मनगरी उज्जैन पूरी तरह शिवमय हो गई है। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में आज भगवान महाकाल अपनी पहली राजसी शाही सवारी में चंद्रमौलेश्वर स्वरूप धारण कर नगर भ्रमण पर निकलेंगे। मान्यता है कि इस दौरान अवंतिकानाथ अपनी प्रजा का हाल जानने स्वयं नगर की गलियों में पधारते हैं। ढोल-नगाड़ों, शंखनाद, झांझ-मंजीरों और 'हर-हर महादेव' के गगनभेदी जयघोष के बीच पूरी उज्जैन नगरी भक्तिमय वातावरण में डूब जाएगी।

श्रावण और भाद्रपद मास में निकलने वाली छह पारंपरिक शाही सवारियों में यह पहली सवारी होगी। इस वर्ष पहली सवारी 3 अगस्त को निकाली जा रही है, जबकि अंतिम राजसी सवारी 7 सितंबर को निकलेगी। परंपरा के अनुसार दोपहर 3:30 बजे सभा मंडप में भगवान चंद्रमौलेश्वर का विशेष पूजन होगा और शाम 4 बजे महाकाल मंदिर से पालकी यात्रा प्रारंभ होगी।

करीब डेढ़ किलोमीटर की यात्रा के बाद शाही सवारी रामघाट पहुंचेगी, जहां पवित्र शिप्रा नदी के जल से भगवान महाकाल का विशेष जलाभिषेक, पूजन और महाआरती संपन्न होगी। इसके बाद सवारी पुनः नगर भ्रमण करते हुए शाम लगभग 7 बजे महाकाल मंदिर लौटेगी।

ऐसा रहेगा बाबा महाकाल की शाही सवारी का मार्ग

महाकाल मंदिर से निकलने वाली पालकी गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार, कहारवाड़ी होते हुए रामघाट पहुंचेगी। वापसी में रामानुजकोट, मोढ़ की धर्मशाला, कार्तिक चौक, ढाबा रोड, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार और गुदरी चौराहा से होकर पुनः महाकाल मंदिर पहुंचेगी।

रामघाट पर जलाभिषेक, गोपाल मंदिर में होगा दिव्य हरि-हर मिलन

रामघाट पर शिप्रा नदी के पवित्र जल से भगवान महाकाल का भव्य अभिषेक और महाआरती की जाएगी। वहीं गोपाल मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण और महाकाल के प्रतीकात्मक हरि-हर मिलन का दुर्लभ एवं दिव्य दृश्य श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण रहेगा। परंपरा के अनुसार सशस्त्र पुलिस बल भगवान महाकाल को गार्ड ऑफ ऑनर भी प्रदान करेगा।

श्रद्धालुओं के लिए प्रशासन के व्यापक इंतजाम

महाकाल मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक के अनुसार, इस वर्ष भी आरती के दौरान कार्तिक मंडप की पहली तीन पंक्तियों से श्रद्धालुओं को चलित आरती दर्शन की सुविधा दी जाएगी। प्रत्येक शाही सवारी में जनजातीय सांस्कृतिक दलों की मनमोहक प्रस्तुतियां और पांच भव्य एलईडी रथ आकर्षण का केंद्र रहेंगे।

श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पूरे मार्ग पर कड़े सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं। स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 15 स्थानों पर मेडिकल टीमें, 24 घंटे एंबुलेंस सेवा, यातायात नियंत्रण और साफ-सफाई की विशेष व्यवस्था की गई है।

भस्म आरती में राजाधिराज स्वरूप के दिव्य दर्शन

श्रावण मास के पहले सोमवार तड़के विश्व प्रसिद्ध भस्म आरती विशेष वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुई। सुबह 2:30 बजे मंदिर के कपाट खुलने के बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक एवं विशेष पूजन हुआ।

भगवान का भांग, चंदन, रुद्राक्ष, रजत आभूषणों, पुष्पमालाओं और शेषनाग के रजत मुकुट से राजाधिराज स्वरूप में भव्य शृंगार किया गया। भगवान गणेश, माता पार्वती और भगवान कार्तिकेय का पूजन कर फल एवं मिष्ठान का नैवेद्य अर्पित किया गया, जबकि महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से पवित्र भस्म समर्पित की गई।

धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पण के पश्चात भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। श्रावण के पहले सोमवार पर देशभर से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया। नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामनाएं व्यक्त करते श्रद्धालुओं के बीच पूरा महाकाल धाम "हर-हर महादेव" और "जय श्री महाकाल" के गगनभेदी उद्घोष से निरंतर गुंजायमान रहा।