शिमला (Naren Danu) : निवेश आकर्षित करने और उद्योगों के लिए कारोबारी माहौल को आसान बनाने की दिशा में हिमाचल प्रदेश सरकार ने कई अहम फैसले लिए हैं। नई व्यवस्था के तहत उद्योगों से जुड़ी मंजूरी प्रक्रिया को सरल बनाया गया है, जिससे उद्योग स्थापित करने में लगने वाला समय कम होगा।
सरकार के बड़े फैसले एक नजर में
30 दिन में फैसला नहीं, तो आवेदन स्वत: मंजूर
उद्योगों से जुड़े किसी भी आवेदन पर संबंधित विभाग यदि 30 दिनों के भीतर निर्णय नहीं लेता, तो उसे स्वत: स्वीकृत माना जाएगा।
वन-टाइम एनओसी की सुविधा
पर्यावरण और प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) अब एक बार जारी होगा, जिससे बार-बार मंजूरी लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
परियोजना अवधि के अनुसार मिलेगी एनओसी
अब एनओसी की वैधता परियोजना की अवधि के अनुसार तय होगी।
5 वर्ष की परियोजना के लिए 5 वर्ष की एनओसी
अन्य परियोजनाओं के लिए 3 या 5 वर्ष तक की वैधता
नवीनीकरण में देरी से उद्योग बंद नहीं होंगे
यदि एनओसी के नवीनीकरण में देरी होती है, तो केवल इसी आधार पर किसी संचालित उद्योग को बंद नहीं किया जाएगा।
छोटे कारोबारियों को भी राहत
10 से कम कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों को छूट
अब 10 से कम कर्मचारियों वाले छोटे प्रतिष्ठानों को श्रम विभाग में पंजीकरण कराने की आवश्यकता नहीं होगी। इससे छोटे व्यापारियों पर अनुपालन का बोझ कम होगा।
क्या बोले उद्योग मंत्री?
उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' के तहत ये सुधार लागू किए गए हैं। उनका कहना है कि पहले अलग-अलग विभागों से एनओसी लेने में काफी समय लगता था, जिससे कई औद्योगिक परियोजनाएं देरी का शिकार होती थीं। नई व्यवस्था से मंजूरी प्रक्रिया तेज होगी और निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा।
सरकार को क्या उम्मीद?
सरकार का मानना है कि इन सुधारों से राज्य में निवेश को बढ़ावा मिलेगा, नए उद्योग स्थापित होंगे, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और हिमाचल प्रदेश में कारोबार करना पहले की तुलना में अधिक आसान और पारदर्शी बनेगा।