जगरांव (चरणजीत सिंह चन्न) : दशमेश किसान मजदूर यूनियन (रजि.) की एक महत्वपूर्ण बैठक जिला प्रधान गुरदयाल सिंह तलवंडी की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में देशव्यापी छात्र आंदोलन की वर्तमान स्थिति पर गंभीर मंथन किया गया। यूनियन ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि सरकार छात्रों के साथ हुए लिखित समझौते से मुकर गई है।
यूनियन नेताओं ने बताया कि नीट (NEET) के मुद्दे पर 36 दिनों तक चले ऐतिहासिक और शांतिपूर्ण छात्र आंदोलन के बाद केंद्रीय हुकूमत और छात्र नेताओं के बीच 3 सूत्रीय समझौता हुआ था। इसके तहत दिल्ली समेत आठ राज्यों में दर्ज सभी फर्जी एफआईआर को तुरंत प्रभाव से रद्द करने पर सहमति बनी थी। लेकिन समझौते के ठीक अगले ही दिन से सरकार अपने वादे से पलट गई। देश भर में छात्र कार्यकर्ताओं के घरों पर छापे मारे जा रहे हैं, उन्हें गिरफ्तार कर जेलों में ठूंसा जा रहा है और दमन चक्र तेजी से चलाया जा रहा है।
हाल ही में बिहार के सीवान जिले में एक शांतिपूर्ण रोष मार्च के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा एके-47 से गोलियां चलाए जाने की घटना की भी कड़े शब्दों में निंदा की गई, जिसमें तीन छात्र कार्यकर्ता गंभीर रूप से घायल हो गए थे। दमनकारी नीतियों के विरोध में 31 जुलाई से दिल्ली सहित पूरे देश में छात्र आंदोलन एक बार फिर से भड़क उठा है।
सरकार को दी कड़ी चेतावनी:
दशमेश यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि मोदी सरकार ने तुरंत अपना समझौता लागू नहीं किया, तो उसे पहले से भी अधिक उग्र देशव्यापी आंदोलन का सामना करना पड़ेगा। यूनियन ने स्पष्ट किया कि इस संघर्ष को "देश बचायो मोर्चा" से जुड़ी 280 किसान-मजदूर यूनियनों का पूर्ण समर्थन प्राप्त होगा और इसके परिणामों की पूरी जिम्मेदारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की होगी।
कॉमरेड हरदेव संधू को दी श्रद्धांजलि:
बैठक के अंत में किसान आंदोलन के प्रमुख नेता कॉमरेड हरदेव संधू के आकस्मिक निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया गया। इसे कीर्ति किसान यूनियन और उनके परिवार के लिए अपूर्णीय क्षति बताते हुए दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई। यूनियन ने घोषणा की कि 4 अगस्त को मानूके गांव में होने वाले भोग एवं श्रद्धांजलि समारोह में यूनियन का एक बड़ा काफिला शामिल होगा।
बैठक के उपरांत फासीवादी और दमनकारी नीतियों पर चल रही सरकार के विरुद्ध रोष मार्च निकालते हुए जोरदार प्रदर्शन भी किया गया।
इस अवसर पर अमरूद सिंह तलवंडी, जसवंत सिंह मान, रणजीत सिंह गुड़े, गुरमेल सिंह ढट्ट समेत कई प्रमुख नेता उपस्थित रहे।