असम में बाढ़ का कहर थमने के बावजूद हालात अब भी भयावह हैं। शिवसागर का नेपाली खूंटी गांव पूरी तरह उजड़ चुका है, जबकि राज्य में मृतकों की संख्या 82 पहुंच गई है। करीब 1.93 लाख लोग अब भी प्रभावित हैं और हजारों परिवार राहत शिविरों तथा अस्थायी तंबुओं में नया जीवन शुरू करने की कोशिश कर रहे हैं।

गुवाहाटी (Naren Danu) : असम में बाढ़ का पानी भले ही धीरे-धीरे उतर रहा हो, लेकिन तबाही के निशान अब साफ दिखाई देने लगे हैं। सबसे अधिक प्रभावित शिवसागर और चराईदेव जिलों में हालात बेहद गंभीर हैं। शिवसागर जिले का नेपाली खूंटी गांव बाढ़ की सबसे दर्दनाक तस्वीर बनकर सामने आया है, जहां 100 से अधिक परिवारों की बस्ती लगभग पूरी तरह उजड़ चुकी है।

गांव में न घर सुरक्षित बचे हैं और न ही दूध उत्पादन के लिए प्रसिद्ध पशुधन। बचे हुए लोग राहत शिविरों और ऊंचे इलाकों में प्लास्टिक के अस्थायी तंबुओं में जीवन की नई शुरुआत करने की कोशिश कर रहे हैं। दुर्गम क्षेत्र होने के कारण यहां राहत और बचाव कार्य भी पूरी तरह नहीं पहुंच पाया है। कई लोगों के लापता होने की आशंका है, हालांकि प्रशासन ने अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

82 लोगों की मौत, पांच जिले अब भी बाढ़ की चपेट में

असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) के 31 जुलाई तक के आंकड़ों के अनुसार, धनसिरि नदी अभी भी नुमलीगढ़ क्षेत्र में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। शुक्रवार को शिवसागर और चराईदेव से दो और शव मिलने के बाद राज्य में बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 82 हो गई है।

फिलहाल शिवसागर, चराईदेव, गोलाघाट, जोरहाट और नगांव जिले सबसे अधिक प्रभावित हैं। इन पांच जिलों के 17 राजस्व मंडलों के 379 गांवों में करीब 1.93 लाख लोग अब भी बाढ़ की मार झेल रहे हैं, जबकि 15,430 हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न है।

हजारों घर और पशुधन का भारी नुकसान

बाढ़ से हजारों मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। शिवसागर और चराईदेव में 879 कच्चे तथा 134 पक्के मकान पूरी तरह ढह गए हैं। वहीं 2,569 से अधिक मकानों को आंशिक नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा हजारों मवेशी शेड और झोपड़ियां भी तबाह हो गई हैं।

पशुधन को भी भारी नुकसान हुआ है। अब तक 10,855 पशु-पक्षी प्रभावित हुए हैं, जबकि अकेले शिवसागर जिले में 1,461 पशु बाढ़ में बह गए।

राहत कार्य जारी, सरकार ने बढ़ाई मदद

राज्य में 54 राहत शिविर और 26 राहत वितरण केंद्र संचालित किए जा रहे हैं, जहां लगभग 13 हजार लोग आश्रय लिए हुए हैं। एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, सेना, पुलिस, एयर फोर्स और अन्य एजेंसियां राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हैं। प्रभावित क्षेत्रों में 64 मेडिकल टीमें तैनात की गई हैं और आवश्यक खाद्यान्न, सरसों का तेल तथा पशुओं के चारे का वितरण किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा लगातार हालात की समीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों को राहत सामग्री के साथ प्रभावित परिवारों तक आर्थिक सहायता पहुंचाने और क्षतिग्रस्त सड़क, पुल तथा अन्य बुनियादी ढांचे की जल्द मरम्मत सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।