जगरांव की जी.एच.जी अकादमी में पहली और दूसरी कक्षा के छात्रों के लिए आयोजित ओरिगामी एक्टिविटी में बच्चों ने रंगीन कागजों से आकर्षक आकृतियां बनाकर अपनी सृजनात्मक क्षमता का प्रदर्शन किया। स्कूल प्रबंधन ने कहा कि ऐसी गतिविधियां बच्चों के हाथ-आंख तालमेल, सूक्ष्म मोटर कौशल और कल्पना शक्ति को मजबूत करती हैं। अध्यक्ष गुरमेल सिंह मल्ही और प्रिंसिपल रमनजोत कौर ग्रेवाल ने बच्चों और शिक्षकों की सराहना की।

जगरांव (चरणजीत सिंह चन्न) : जी.एच.जी अकादमी, जगरांव में पहली और दूसरी कक्षा के नन्हे-मुन्ने छात्रों के लिए एक विशेष और बेहद आकर्षक ओरिगामी (कागज़ मोड़ने की कला) एक्टिविटी का आयोजन किया गया। इस रचनात्मक सत्र के दौरान बच्चों ने अपनी कल्पना और उंगलियों के कमाल से रंग-बिरंगे कागज़ों को शानदार आकृतियों में ढालकर सबको अचंभित कर दिया।

​"साधारण कागज़ से असाधारण कृतियां: बच्चों ने साबित किया कि हुनर को किसी बड़े साधन की नहीं, बल्कि सच्ची रचनात्मकता की ज़रूरत होती है।"
​बच्चों के विकास में मददगार रचनात्मक पहल
​इस एक्टिविटी का मुख्य उद्देश्य केवल बच्चों का मनोरंजन करना नहीं, बल्कि उनके समग्र विकास को गति देना था। कागज़ को अलग-अलग तरीकों से मोड़ने की इस प्रक्रिया से छात्रों में निम्नलिखित लाभ देखे गए।

​हाथ और आँखों का बेहतर तालमेल: बच्चों ने अपनी एकाग्रता का परिचय देते हुए सटीकता से कागज़ को मोड़ा।
​सूक्ष्म मोटर कौशल (Fine Motor Skills) का विकास: उंगलियों की नन्हीं गतिविधियों ने बच्चों की पेशीय मज़बूती और कौशल को निखारा।

​कल्पना शक्ति में विस्तार: बच्चों ने अपनी सोच के अनुसार विभिन्न आकृतियों को रूप दिया, जिससे उनकी सृजनात्मकता को पंख लगे।

​स्कूल प्रबंधन और शिक्षकों की सराहना
​नन्हे कलाकारों के इस शानदार प्रदर्शन और उत्साह को देखकर स्कूल प्रबंधन ने उनकी भरपूर प्रशंसा की। स्कूल के अध्यक्ष गुरमेल सिंह मल्ही और प्रिंसिपल रमनजोत कौर ग्रेवाल ने बच्चों की इस सक्रिय भागीदारी पर खुशी जाहिर की।
​उन्होंने कहा कि इस तरह की गतिविधियां बच्चों के अंदर छिपी प्रतिभा को बाहर निकालने और उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने में बेहद अहम भूमिका निभाती हैं। इस सफल आयोजन के लिए उन्होंने न सिर्फ नन्हे छात्रों की पीठ थपथपाई, बल्कि इसमें पूरी तन्मयता से सहयोग देने वाले शिक्षकों के प्रयासों की भी सराहना की।