मानसून सत्र के दौरान कांग्रेस, समाजवादी पार्टी समेत कई विपक्षी दलों के सांसदों ने संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस ने छात्र प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कथित कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार से जवाब और गृहमंत्री अमित शाह से माफी की मांग की, जबकि समाजवादी पार्टी ने राम मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाते हुए सरकार पर निशाना साधा।

नई दिल्ली (Naren Danu) : संसद का मानसून सत्र गुरुवार को सदन के भीतर जितना गर्म रहा, उससे पहले संसद परिसर में भी राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमाया रहा। विभिन्न विपक्षी दलों ने अलग-अलग मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला और संसद परिसर को विरोध प्रदर्शन का मंच बना दिया।

कांग्रेस और सहयोगी दलों के सांसदों ने दिल्ली में 20 जुलाई को हुए छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस की कथित कार्रवाई का मुद्दा उठाया। मकर द्वार के निकट प्रदर्शन करते हुए सांसदों ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ बल प्रयोग किया गया। विपक्ष ने इस मामले में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से सार्वजनिक माफी की मांग की और प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर तत्काल वापस लेने की मांग दोहराई।

दूसरी ओर समाजवादी पार्टी के सांसदों ने राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे के कथित प्रबंधन को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश की। सांसदों ने नारेबाजी करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की और आरोप लगाया कि चढ़ावे के प्रबंधन में पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए।

विपक्षी नेताओं का कहना है कि छात्र आंदोलनों पर सख्ती लोकतांत्रिक अधिकारों के विपरीत है और सरकार को इस पूरे प्रकरण पर संसद में जवाब देना चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री इस मुद्दे पर अपना पक्ष स्पष्ट करें।

विपक्ष के प्रमुख मुद्दे

छात्र आंदोलन पर पुलिस की कथित कार्रवाई का विरोध।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से सार्वजनिक माफी की मांग।
प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज एफआईआर वापस लेने की मांग।
राम मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग।
संसद के भीतर और बाहर सरकार को घेरने की विपक्ष की संयुक्त रणनीति।

संसद के मानसून सत्र के दौरान विपक्ष ने साफ संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में भी ऐसे जनसरोकारों और राजनीतिक मुद्दों को लेकर सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति जारी रहेगी।