पंजाब यूनिवर्सिटी की पीएचडी शोधार्थी ज्योति की करंट लगने से हुई मौत के बाद प्रशासनिक कार्रवाई तेज हो गई है। विश्वविद्यालय ने संबंधित एसडीओ और एक्सईएन को निलंबित कर दिया है, लेकिन परिवार मौत के कारणों को लेकर संतुष्ट नहीं है। परिजनों ने निष्पक्ष जांच, जिम्मेदारों पर कार्रवाई और लिखित आश्वासन मिलने तक शव स्वीकार नहीं करने का फैसला लिया है।

चंडीगढ़ (अजीत झा.) : पंजाब यूनिवर्सिटी में पीएचडी शोधार्थी ज्योति की करंट लगने से हुई दर्दनाक मौत का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। घटना के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए संबंधित एसडीओ और एक्सईएन को सस्पेंड कर दिया है। वहीं, मृतका के परिजनों ने मौत के कारणों पर सवाल उठाते हुए शव लेने से इनकार कर दिया है। परिवार ने साफ कहा है कि जब तक मामले की निष्पक्ष जांच नहीं होती और मौत का सही कारण सामने नहीं आता, तब तक वह अंतिम संस्कार नहीं करेंगे।

ज्योति के परिजन बुधवार को जीएमएसएच-16 पहुंचे, जहां उन्होंने पुलिस और प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। परिजनों का कहना है कि उन्हें अभी तक मौत से जुड़ी संतोषजनक जानकारी नहीं दी गई है। परिवार ने पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग दोहराई है।

परिवार ने मौत के कारणों पर उठाए सवाल

मृतका के चाचा जितेंद्र कुमार ने कहा कि परिवार को अब तक यह स्पष्ट नहीं बताया गया कि आखिर हादसा कैसे हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि ज्योति की मां को अभी तक सिर्फ यही जानकारी दी गई थी कि बेटी अस्पताल में भर्ती है, जबकि पिता को उसकी मौत की सूचना दे दी गई। बेटी की मौत की खबर सुनने के बाद पिता की तबीयत भी बिगड़ गई है।

जितेंद्र कुमार ने कहा कि विश्वविद्यालय की ओर से बताया जा रहा है कि ज्योति की मौत करंट लगने से हुई है, लेकिन परिवार को शरीर पर करंट लगने के स्पष्ट निशान दिखाई नहीं दे रहे हैं। ऐसे में परिजन इस बात को लेकर संतुष्ट नहीं हैं और पूरे मामले की गहराई से जांच चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि अगर यह हादसा है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और अगर किसी तरह की लापरवाही हुई है तो दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

मामा बोले- जांच के बिना शव स्वीकार नहीं करेंगे

ज्योति के मामा सुनील ने कहा कि परिवार को न्याय चाहिए। उन्होंने कहा कि जब तक जांच के लिखित आदेश नहीं मिलते और मौत की असली वजह सामने नहीं आती, तब तक परिवार शव स्वीकार नहीं करेगा।

उन्होंने कहा कि मामले में निष्पक्ष जांच जरूरी है ताकि सच्चाई सामने आ सके। परिवार ने दोबारा मांग रखी कि पूरे घटनाक्रम की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए।

होनहार शोधार्थी थी ज्योति, वैज्ञानिक बनने का था सपना

परिजनों के अनुसार ज्योति परिवार की सबसे बड़ी संतान थी। वह पढ़ाई में शुरू से ही काफी होनहार और मेहनती थी। उसने महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी (MDU) से बीएससी और हिसार से एमएससी की पढ़ाई पूरी करने के बाद पंजाब यूनिवर्सिटी में बायोटेक्नोलॉजी विषय में पीएचडी शुरू की थी।

परिवार ने बताया कि ज्योति का सपना वैज्ञानिक बनकर देश के लिए काम करना था। वह अपने शोध कार्य को लेकर काफी गंभीर रहती थी और पढ़ाई को लेकर हमेशा समर्पित रहती थी।

छात्रों में आक्रोश, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

ज्योति की मौत के बाद पंजाब यूनिवर्सिटी के छात्रों में भारी आक्रोश देखने को मिला। छात्रों ने आरोप लगाया कि कैंपस में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पहले भी कई शिकायतें सामने आती रही हैं, लेकिन प्रशासन ने उन्हें गंभीरता से नहीं लिया।

प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने मांग की कि पूरे परिसर का स्वतंत्र सुरक्षा ऑडिट कराया जाए, जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और मृतका के परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए।

छात्रों का कहना है कि खुले बिजली बॉक्स, जलभराव और खराब विद्युत व्यवस्था जैसी समस्याएं विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए खतरा बनी हुई हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मामले में ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

प्रशासन की कार्रवाई के बाद भी उठ रहे सवाल

विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से एसडीओ और एक्सईएन को निलंबित किए जाने के बाद भी छात्रों और परिजनों का कहना है कि केवल निलंबन पर्याप्त नहीं है। उनकी मांग है कि घटना की पूरी जिम्मेदारी तय की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए स्थायी कदम उठाए जाएं।

पीयू शोधार्थी ज्योति की मौत ने एक बार फिर विश्वविद्यालय परिसरों में सुरक्षा और रखरखाव व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजरें आगे होने वाली जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं।