टाइगर कॉम्प्लेक्स में पोस्टर जारी कर विद्यार्थियों और आगंतुकों को बाघों के महत्व, प्राकृतिक आवास और वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया। राज्य सूचना आयुक्त हरप्रीत संधू ने कहा कि बाघ स्वस्थ पर्यावरण और जैव विविधता का महत्वपूर्ण प्रतीक हैं, जिनका संरक्षण जंगलों और पारिस्थितिकी संतुलन से जुड़ा है।

जीरकपुर: एम.सी. जूलॉजिकल पार्क, छतबीड़ में बुधवार को अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर बाघ संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम, पोस्टर जारी करने, संवाद सत्र और शैक्षणिक गतिविधियों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बाघों के संरक्षण और वन्यजीवों के महत्व के प्रति लोगों, विशेषकर विद्यार्थियों को जागरूक करना था।

कार्यक्रम के दौरान पंजाब के राज्य सूचना आयुक्त हरप्रीत संधू ने टाइगर कॉम्प्लेक्स में बाघ संरक्षण पर आधारित पोस्टर जारी किया। इस मौके पर मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) सतिंदर कुमार सागर (आईएफएस), फील्ड डायरेक्टर नलिन यादव (आईएफएस) सहित चिड़ियाघर का स्टाफ मौजूद रहा। हरप्रीत संधू ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि बाघ भारत का राष्ट्रीय पशु होने के साथ स्वस्थ वन पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण संकेतक है। उन्होंने कहा कि बाघों का संरक्षण, जंगलों, जैव विविधता और पर्यावरणीय संतुलन की रक्षा से सीधे जुड़ा हुआ है।

इस दौरान "Their Roar Keeps the Forest Alive" विषय पर जागरूकता सत्र आयोजित किया गया, जिसमें चिड़ियाघर के आगंतुकों, स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थियों और अन्य आमंत्रित लोगों ने भाग लिया। एक अन्य सत्र में जनसंपर्क एवं वन्यजीव शिक्षा अधिकारी हरपाल सिंह, सरकारी हाई स्कूल छत की प्रिंसिपल मालती सचदेवा, समन्वयक शिक्षिका सुषमा तथा वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. सिद्धार्थ शर्मा ने बाघों की वर्तमान स्थिति, उनके प्राकृतिक आवास, शिकार, मानव-वन्यजीव संघर्ष और संरक्षण प्रयासों पर विस्तार से जानकारी दी।

मुख्य वन संरक्षक सतिंदर कुमार सागर ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस की शुरुआत वर्ष 2010 में रूस के सेंट पीटर्सबर्ग टाइगर समिट में हुई थी, जहां बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए वैश्विक स्तर पर संकल्प लिया गया था। वहीं फील्ड डायरेक्टर नलिन यादव ने कहा कि इस दिवस का उद्देश्य बाघों और उनके प्राकृतिक आवास के संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करना है। उन्होंने संदेश दिया कि "बाघ सुंदरता, बहादुरी, शक्ति और राष्ट्र की पहचान का प्रतीक है। बाघ बचाइए, देश का गौरव बचाइए।"

कार्यक्रम के अंत में चिड़ियाघर के कर्मचारियों ने "TIGERS" शब्द के प्रत्येक अक्षर के माध्यम से बाघ संरक्षण का प्रेरक संदेश भी साझा किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों और आगंतुकों ने भाग लेकर वन्यजीव संरक्षण का संकल्प लिया।