फार्मेसी अफसर भर्ती परीक्षा में कथित गड़बड़ी के बाद कांग्रेस, भाजपा और अकाली दल ने मान सरकार को घेरा। विपक्ष शिक्षा और स्वास्थ्य मंत्रियों के इस्तीफे की मांग कर रहा है, वहीं सरकार इसे पेपर लीक नहीं बल्कि हाईटेक नकल गिरोह का मामला बता रही है। इस बीच छात्र आंदोलन से चर्चा में आई सीजेपी की रणनीति पर भी नजरें टिकी हैं।

चंडीगढ़ (Naren Danu) : पेपर लीक के मुद्दे ने पंजाब की राजनीति को गर्मा दिया है। फरीदकोट स्थित बाबा फरीद यूनिवर्सिटी से जुड़ी फार्मेसी ऑफिसर भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं के बाद विपक्षी दलों ने भगवंत मान सरकार पर हमला तेज कर दिया है। कांग्रेस, भाजपा और शिरोमणि अकाली दल ने सरकार को घेरते हुए शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस और स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह के इस्तीफे की मांग उठाई है।

वहीं, आम आदमी पार्टी सरकार इस पूरे मामले को पेपर लीक मानने से इनकार कर रही है। मुख्यमंत्री भगवंत मान का कहना है कि राज्य में उनकी सरकार के कार्यकाल के दौरान कोई पेपर लीक नहीं हुआ। सरकार का दावा है कि सामने आया मामला हाईटेक नकल गिरोह का था, जिसमें पेन कैमरा और ब्लूटूथ डिवाइस का इस्तेमाल किया गया था। पुलिस ने समय रहते कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किया।

विपक्ष का आरोप- छह परीक्षाओं में गड़बड़ी

विपक्षी दलों का आरोप है कि पंजाब में पिछले कुछ वर्षों के दौरान कई भर्ती और परीक्षाओं में अनियमितताएं सामने आई हैं। कांग्रेस ने दावा किया कि नायब तहसीलदार भर्ती परीक्षा, कृषि अधिकारी भर्ती परीक्षा, फार्मासिस्ट भर्ती परीक्षा, कक्षा 12वीं की अंग्रेजी परीक्षा और ग्रुप-बी सहित कई मामलों में सवाल उठे हैं।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने संसद परिसर में प्रदर्शन करते हुए आरोप लगाया कि पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था की खामियों से लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है। भाजपा और अकाली दल ने भी इसे युवाओं के साथ अन्याय बताते हुए सरकार से जवाब मांगा है।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को बनाया राजनीतिक मुद्दा

केंद्र में पेपर लीक विवाद के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर विपक्ष पंजाब सरकार पर दबाव बना रहा है। विपक्ष का तर्क है कि जब केंद्र सरकार परीक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी लेते हुए कार्रवाई कर सकती है तो पंजाब सरकार को भी नैतिक जिम्मेदारी तय करनी चाहिए।

विपक्षी नेताओं का कहना है कि आम आदमी पार्टी केंद्र सरकार पर पेपर लीक को लेकर लगातार सवाल उठाती रही है, लेकिन पंजाब में इसी तरह के आरोपों पर उसका रुख अलग दिखाई दे रहा है।

सीजेपी की भूमिका पर भी उठे सवाल

जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन के जरिए चर्चा में आई कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की पंजाब पेपर लीक मामले में चुप्पी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि जो संगठन छात्रों के अधिकारों की बात करता रहा है, वह पंजाब के युवाओं के मुद्दे पर सक्रिय क्यों नहीं है।

दिल्ली भाजपा नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने सीजेपी से सवाल करते हुए कहा कि अगर संगठन देशभर के छात्रों के हितों की लड़ाई लड़ने की बात करता है तो पंजाब के मामले में भी उसे आवाज उठानी चाहिए।

सीजेपी बोली- जल्द तय करेंगे रणनीति

सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा है कि पंजाब पेपर लीक मामले पर संगठन जल्द अपनी रणनीति घोषित करेगा। उन्होंने कहा कि दिल्ली का आंदोलन हाल ही में खत्म हुआ है और पंजाब के मुद्दे पर उतरने से पहले संगठन पूरी तैयारी कर रहा है।

अब सरकार और विपक्ष आमने-सामने

पंजाब में पेपर लीक का मुद्दा अब सिर्फ परीक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह बड़ा राजनीतिक विवाद बन चुका है। विपक्ष इसे सरकार की प्रशासनिक विफलता बता रहा है, जबकि सरकार इसे नकल गिरोह की कार्रवाई बताकर बचाव कर रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा विधानसभा और सड़क दोनों जगहों पर और गरमाने की संभावना है।