पटियाला (Naren Danu) : नाभा के गांव मैहस की बेटी हरजिंदर कौर ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में अपनी मेहनत और जज्बे का लोहा मनवाते हुए देश के लिए सिल्वर मेडल जीत लिया। 30 वर्षीय हरजिंदर ने 69 किलो भार वर्ग में कुल 227 किलो वजन उठाकर यह उपलब्धि हासिल की। यह सिर्फ एक पदक नहीं, बल्कि वर्षों के संघर्ष, आर्थिक चुनौतियों और परिवार के त्याग की कहानी है।
हरजिंदर कौर का परिवार खेतीबाड़ी से जुड़ा है। उनके पिता साहब सिंह गांव मैहस में खेती करते हैं। कभी हालात ऐसे थे कि परिवार के छह सदस्य दो कमरों के छोटे से मकान में रहते थे। अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने से पहले हरजिंदर ने गांव में ही कड़ी मेहनत की। बचपन में वह घर के कामों में हाथ बंटाने के साथ भैंसों के लिए चारा काटने वाली मशीन पर घंटों मेहनत करती थीं। आज उन्हीं मेहनती हाथों ने देश के लिए कॉमनवेल्थ में दूसरा पदक जीतकर इतिहास रच दिया है।
परिवार ने बेची जमीन, बेटी ने मेहनत से बदली किस्मत
हरजिंदर कौर के वेटलिफ्टिंग सफर में परिवार का बड़ा योगदान रहा। खेल उपकरणों, प्रशिक्षण और पढ़ाई जारी रखने के लिए परिवार को जमीन तक बेचनी पड़ी। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। वेटलिफ्टिंग से पहले वह कबड्डी और रस्साकसी की राज्य स्तरीय खिलाड़ी भी रह चुकी हैं।
पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला के कोच परमजीत शर्मा ने उनकी प्रतिभा को पहचानते हुए उन्हें वेटलिफ्टिंग में आगे बढ़ने की सलाह दी। वर्ष 2016 में उन्होंने पंजाबी यूनिवर्सिटी से इस खेल की शुरुआत की और धीरे-धीरे राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। वर्ष 2021 में कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग सीनियर चैंपियनशिप में उन्होंने सिल्वर मेडल जीता था।
एक समय छोड़ा था खेल, फिर वापसी कर लिखी नई कहानी
हरजिंदर कौर के लिए यह सफर आसान नहीं था। महिला होने के कारण कई लोगों ने उन्हें वेटलिफ्टिंग छोड़ने की सलाह दी और कहा कि इससे शरीर पर असर पड़ेगा। इससे निराश होकर वह कुछ समय के लिए घर लौट आई थीं। लेकिन कोच और परिवार के प्रोत्साहन के बाद उन्होंने दोबारा अभ्यास शुरू किया और अपनी मेहनत से आलोचकों को जवाब दिया।
परिवार में सबसे छोटी हरजिंदर के एक भाई और एक बहन हैं। जब उनका जन्म हुआ था तो परिवार में निराशा का माहौल था, लेकिन बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स-2022 में कांस्य पदक जीतने के बाद पिता साहब सिंह ने गर्व से कहा था, "तुम मेरी बेटी नहीं, बेटा हो।"
स्नैच और क्लीन एंड जर्क में दिखाया दम
ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में हरजिंदर कौर ने स्नैच और क्लीन एंड जर्क दोनों मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन किया। स्नैच में उन्होंने पहले 99 किलो वजन उठाकर रिकॉर्ड बनाया और फिर अंतिम प्रयास में 101 किलो वजन उठाकर अपना ही रिकॉर्ड बेहतर किया।
क्लीन एंड जर्क में उन्होंने 120 किलो, 123 किलो और अंतिम प्रयास में 126 किलो वजन सफलतापूर्वक उठाया। दोनों चरणों को मिलाकर उन्होंने कुल 227 किलो वजन उठाकर सिल्वर मेडल अपने नाम किया।
इस वर्ग का गोल्ड मेडल कनाडा की शार्टलेट सिमोन्यू ने 240 किलो वजन उठाकर जीता। हरजिंदर कौर की यह उपलब्धि न केवल पंजाब बल्कि पूरे देश के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बन गई है।