ग्वालियर (Naren Danu) : सिंधिया राजघराने की अरबों रुपये की पैतृक संपत्ति के बंटवारे को लेकर तैयार किया गया आपसी समझौता (राजीनामा) एक बार फिर कानूनी विवाद में घिर गया है। अतिरिक्त सत्र न्यायालय (एडीजे) में मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी बुआ स्वर्गीय पद्मावती राजे की बेटी प्रतिमा देवी राना ने समझौते पर आपत्ति दर्ज कराते हुए संपत्ति में अपने अधिकार का दावा पेश किया।
प्रतिमा देवी राना की आपत्ति के बाद अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त 2026 तय की है। इस बीच प्रतिमा देवी की मौसियां वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे और उषा राजे ने अदालत से जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा, जिसे न्यायालय ने स्वीकार कर लिया।
समझौते में शामिल नहीं किए जाने पर उठाया सवाल
सिंधिया परिवार की पैतृक संपत्ति को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद में हाल ही में पक्षकारों ने आपसी सहमति से समझौता तैयार कर अदालत में पेश किया था। हालांकि, प्रतिमा देवी का कहना है कि उनकी मां पद्मावती राजे भी संपत्ति में बराबर की हिस्सेदार थीं, लेकिन उनके उत्तराधिकारियों को समझौते में शामिल नहीं किया गया।
बताया गया कि मूल वाद में प्रतिमा देवी और उनकी बहन कनिका देवी सिंह को पक्षकार बनाया गया था, लेकिन सुनवाई के दौरान उपस्थित नहीं होने पर अदालत ने उन्हें पहले एक्स-पार्टी घोषित कर दिया था। अब प्रतिमा देवी ने दोबारा न्यायिक प्रक्रिया में शामिल होने और अपने हिस्से का दावा करने के लिए आवेदन दिया है।
फिर से शुरू हो सकता है पूरा विवाद
सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष यह तथ्य भी आया कि मामले की मुख्य फाइल से जुड़े कुछ पुराने रिकॉर्ड फिलहाल उपलब्ध नहीं हैं, जिनकी तलाश की जा रही है। ऐसे में सुनवाई आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया।
कानूनी जानकारों का मानना है कि यदि अदालत प्रतिमा देवी की आपत्ति स्वीकार कर लेती है, तो पहले से तैयार किया गया आपसी समझौता निरस्त हो सकता है और सिंधिया परिवार की संपत्ति का पूरा विवाद नए सिरे से सुनवाई के दायरे में आ सकता है।
क्या है पूरा मामला
सिंधिया राजघराने की पैतृक संपत्ति के बंटवारे को लेकर वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे और उषा राजे ने अपने हिस्से की मांग करते हुए सिविल वाद दायर किया था। लंबे समय तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद समझौते का प्रारूप तैयार हुआ, लेकिन अब प्रतिमा देवी राना की आपत्ति ने इस बहुचर्चित मामले को नया कानूनी मोड़ दे दिया है। अदालत के अगले फैसले पर सभी पक्षों की नजरें टिकी हुई हैं।