जिला बार एसोसिएशन ने अदालतों और सरकारी कार्यालयों में काम से दूरी बनाने का ऐलान किया, उल्लंघन करने वाले सदस्यों पर होगी अनुशासनात्मक कार्रवाई; कमिश्नर, डीसी कार्यालय समेत कई विभागों से मांगा सहयोग, मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का फैसला।

जालंधर (Naren Danu) : लीगल एड डिफेंस काउंसिल (LADC) नीति के विरोध में जालंधर जिला बार एसोसिएशन का आंदोलन मंगलवार को 21वें दिन भी जारी रहा। अपनी मांगों को लेकर अधिवक्ताओं ने विरोध तेज करते हुए 34 वकीलों को भूख हड़ताल पर बैठाया। बार एसोसिएशन ने साफ कर दिया है कि मांगों पर सकारात्मक फैसला होने तक संघर्ष जारी रहेगा।

आंदोलन के तहत बार एसोसिएशन ने एक बार फिर ‘नो वर्क डे’ का ऐलान किया है। इसके चलते वकील अदालतों और विभिन्न सरकारी कार्यालयों में किसी भी तरह की पेशेवर गतिविधियों में हिस्सा नहीं लेंगे। एसोसिएशन ने सभी सदस्यों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि कोई भी अधिवक्ता अदालती कार्य करता पाया गया तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

सदस्यों से एकजुटता बनाए रखने की अपील

बार एसोसिएशन ने अपने सभी सदस्यों से नो वर्क डे को पूरी तरह सफल बनाने और भूख हड़ताल पर बैठे अधिवक्ताओं के समर्थन में एकजुट रहने की अपील की है। एसोसिएशन का कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य वकीलों और न्याय व्यवस्था से जुड़े हितों की रक्षा करना है।

सरकारी विभागों से भी मांगा सहयोग

बार एसोसिएशन ने आंदोलन के दौरान विभिन्न सरकारी विभागों के अधिकारियों से सहयोग की अपील की है। इनमें कमिश्नर कार्यालय, डिविजनल कमिश्नर कार्यालय, डिप्टी कमिश्नर, अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर, जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, राजस्व विभाग, एसडीएम कार्यालय, डीडीपीओ, डीआरओ, तहसीलदार कार्यालय, निदेशक भूमि अभिलेख, स्थायी लोक अदालत, श्रम न्यायालय और औद्योगिक न्यायाधिकरण समेत कई विभाग शामिल हैं।

इसके अलावा करतारपुर, भोगपुर और आदमपुर के तहसीलदार व नायब तहसीलदार कार्यालयों तथा सहकारी समितियों के संयुक्त एवं उप-पंजीयक कार्यालयों से भी आंदोलन के दौरान सहयोग करने का आग्रह किया गया है।

बार एसोसिएशन ने दोहराया कि जब तक LADC नीति को लेकर उनकी मांगों पर संतोषजनक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन और विरोध कार्यक्रम जारी रहेंगे।