राजकीय हाई स्कूल डड्डू माजरा की अटल टिंकरिंग लैब विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच और नवाचार की भावना विकसित करने का माध्यम बन रही है। कक्षा 5 से 10 तक के छात्र वास्तविक समस्याओं के समाधान के लिए मॉडल तैयार कर रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में सफलता हासिल कर स्कूल ने शिक्षा के क्षेत्र में नई पहचान बनाई है।

चंडीगढ़ : चंडीगढ़ के सरकारी विद्यालय अब केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित शिक्षा नहीं दे रहे, बल्कि अनुभवात्मक शिक्षा (एक्सपीरिएंशियल लर्निंग) के माध्यम से विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, नवाचार और समस्या समाधान की क्षमता विकसित कर रहे हैं। इसी कड़ी में राजकीय हाई स्कूल, डड्डू माजरा की अटल टिंकरिंग लैब विद्यार्थियों के लिए नवाचार का केंद्र बनकर उभरी है।

विद्यालय में कक्षा 5 से 10 तक के छात्र-छात्राएं एटीएल प्रभारी भारत भूषण के मार्गदर्शन में वास्तविक जीवन की समस्याओं की पहचान कर उनके समाधान के लिए मॉडल तैयार करते हैं। प्रयोग आधारित सीखने की इस प्रक्रिया से विद्यार्थियों में रचनात्मक सोच, टीमवर्क और तकनीकी कौशल का विकास हो रहा है।

विद्यालय के विद्यार्थियों ने अटल टिंकरिंग मैराथन, इंस्पायर-मानक, स्कूल इनोवेशन मैराथन, आईरिस नेशनल फेयर और नेशनल टॉय फेयर जैसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय आयोजनों में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। वर्ष 2025 में विद्यालय की 28 परियोजनाओं ने राष्ट्रीय बिल्डाथॉन में भाग लिया था।

विद्यालय को ‘स्टार एटीएल ऑफ इंडिया’ सम्मान भी मिल चुका है। इसके अलावा राज्य स्तरीय विज्ञान, गणित और पर्यावरण प्रदर्शनियों में भी विद्यालय कई बार ओवरऑल बेस्ट ट्रॉफी जीत चुका है।

शिक्षा विभाग के अनुसार अनुभवात्मक शिक्षा विद्यार्थियों को केवल परीक्षा की तैयारी तक सीमित नहीं रखती, बल्कि उन्हें जिज्ञासु, रचनात्मक और नवाचारी बनाती है। विभाग का मानना है कि इस तरह की पहल विकसित भारत-2047 के लक्ष्य के अनुरूप वैज्ञानिक दृष्टिकोण और नवाचार आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।