मंगलवार को हुई तेज बारिश के बाद जीरकपुर फ्लाईओवर पर जल निकासी व्यवस्था पूरी तरह फेल नजर आई। पाइप लाइन में लीकेज के कारण कई स्थानों से ऊंचाई से पानी गिरता रहा, जिससे वाहन चालकों को परेशानी और हादसे का खतरा बढ़ गया। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि नियमित रखरखाव नहीं होने से समस्या पैदा हुई और प्रशासन से तुरंत समाधान की मांग की।

जीरकपुर : मंगलवार को हुई बारिश ने जीरकपुर फ्लाईओवर के रखरखाव की पोल खोलकर रख दी। फ्लाईओवर पर लगी जल निकासी पाइप लाइन में लीकेज होने के कारण कई स्थानों से ऊंचाई से तेज धार में पानी सड़क पर गिरता रहा। फ्लाईओवर के नीचे का नजारा किसी झरने से कम नहीं था। अचानक ऊपर से गिरते पानी के कारण राहगीरों और वाहन चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा, जबकि दोपहिया वाहन चालकों के लिए हालात सबसे अधिक जोखिम भरे रहे।

बारिश के दौरान फ्लाईओवर के नीचे से गुजर रहे कई वाहन चालक अचानक ऊपर से गिरते तेज पानी से घबरा गए। कुछ बाइक सवारों को बीच रास्ते में रुकना पड़ा, जबकि कई लोगों ने जोखिम उठाते हुए उसी तेज धार के बीच से वाहन निकाले। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि कोई बाइक चालक अचानक संतुलन खो दे तो बड़ा सड़क हादसा हो सकता है।

रखरखाव पर उठे सवाल

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि फ्लाईओवर की नियमित देखरेख नहीं होने के कारण यह स्थिति पैदा हुई है। उनका कहना है कि यदि जल निकासी पाइप लाइन का समय-समय पर निरीक्षण और मरम्मत की जाती तो बारिश के दौरान सड़क पर इस तरह पानी नहीं गिरता। लोगों के अनुसार यह केवल असुविधा का मामला नहीं, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।

बारिश में बढ़ जाता है खतरा

नागरिकों का कहना है कि सामान्य दिनों की तुलना में बारिश के समय यह समस्या कई गुना अधिक खतरनाक हो जाती है। सड़क पहले से गीली होने के कारण अचानक ऊपर से गिरने वाला तेज पानी वाहन चालकों का संतुलन बिगाड़ सकता है। विशेषकर दोपहिया वाहन चालकों और पैदल राहगीरों के लिए यह स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है।


तत्काल कार्रवाई की मांग

स्थानीय लोगों ने एनएचएआई से फ्लाईओवर की लीकेज को तुरंत ठीक कराने और पूरे ढांचे का तकनीकी निरीक्षण कराने की मांग की है। उनका कहना है कि प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार करने के बजाय समय रहते प्रभावी कदम उठाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

इस बारे में जब नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया के अधिकारियों से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने फोन नहीं उठाया।