नई दिल्ली (Naren Danu) : दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के टोल टैक्स एवं ईसीसी (ईसीसी) कलेक्शन टेंडर को लेकर आम आदमी पार्टी (आप) ने भाजपा शासित निगम पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी ने आरोप लगाया कि टेंडर प्रक्रिया में अधिक राजस्व देने वाली कंपनियों की बोलियों को नजरअंदाज कर कम राशि की बोली को आगे बढ़ाया गया है, जिससे निगम को सैकड़ों करोड़ रुपये के संभावित राजस्व का नुकसान हो सकता है। पार्टी ने पूरे टेंडर को रद्द कर नए सिरे से पारदर्शी ओपन टेंडर जारी करने की मांग की है।
सोमवार को एमसीडी की स्थायी समिति की बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में पार्टी के एमसीडी सह-प्रभारी प्रवीण कुमार ने दावा किया कि टोल टैक्स एवं ईसीसी कलेक्शन के लिए सात कंपनियों ने निविदा प्रक्रिया में हिस्सा लिया था। इनमें चार कंपनियों ने अधिक राशि की बोलियां लगाई थीं, लेकिन उन्हें स्वीकार नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि करीब ₹1100 करोड़ की सबसे ऊंची बोली को दरकिनार कर ₹936 करोड़ की बोली को आगे बढ़ाया गया, जिससे नगर निगम को भारी आर्थिक नुकसान होने की आशंका है।
प्रवीण कुमार ने आरोप लगाया कि टेंडर की शर्तों में भी ऐसे बदलाव किए गए, जिनसे कुछ चुनिंदा कंपनियों को लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई। उनका कहना था कि जब निगम को अधिक राजस्व मिल सकता था, तब कम राशि वाली बोली को प्राथमिकता देने का कोई औचित्य नहीं बनता। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और टेंडर प्रक्रिया को निरस्त कर दोबारा खुली निविदा जारी करने की मांग की।
पार्टी की सह-प्रभारी प्रीति डोगरा ने भी टेंडर प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि नगर निगम में कुछ फैसले सार्वजनिक हित के बजाय चुनिंदा लोगों को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से लिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अधिक राजस्व वाली बोली को नजरअंदाज करना वित्तीय पारदर्शिता और जनहित दोनों के खिलाफ है।
स्थायी समिति के सदस्य प्रवीण कुमार राजपूत ने आरोप लगाया कि नियमानुसार इस तरह के महत्वपूर्ण टेंडर को स्थायी समिति के समक्ष लाया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। उनके अनुसार लंबे समय तक समिति की बैठकें नहीं होने के कारण कई अहम निर्णय निर्धारित प्रक्रिया से बाहर लिए गए और टोल टैक्स टेंडर भी उन्हीं मामलों में शामिल है।
राजपूत ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने स्थायी समिति की बैठक में यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया है और भविष्य में भी नगर निगम के राजस्व से जुड़े सभी मामलों में पारदर्शिता, जवाबदेही और नियमों के पालन की मांग जारी रखेगी।