आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पंजाब में पेपर लीक के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि परीक्षा के दौरान कुछ अभ्यर्थियों ने स्मार्ट पेन से नकल की कोशिश की थी, जिन्हें तुरंत पकड़ लिया गया। उन्होंने दावा किया कि यह पेपर लीक नहीं था। साथ ही शिक्षा व्यवस्था और छात्र आंदोलनों को लेकर केंद्र सरकार पर भी सवाल उठाए।

नई दिल्ली (Naren Danu) : आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पंजाब में कथित पेपर लीक के आरोपों को राजनीतिक दुष्प्रचार करार देते हुए कहा कि जिस परीक्षा को लेकर विवाद खड़ा किया जा रहा है, उसमें प्रश्नपत्र लीक नहीं हुआ था, बल्कि कुछ अभ्यर्थियों ने स्मार्ट पेन के जरिए नकल करने की कोशिश की थी, जिसे परीक्षा के दौरान ही विफल कर दिया गया।

पार्टी मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए केजरीवाल ने कहा कि पंजाब सरकार की शिक्षा क्षेत्र में उपलब्धियों को बदनाम करने के लिए विपक्ष झूठा प्रचार कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि आम आदमी पार्टी के शासन में पंजाब शिक्षा के क्षेत्र में देश के 27वें स्थान से पहले स्थान पर पहुंचा है और इसी वजह से विरोधी दल भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे हैं।

केजरीवाल ने कहा कि परीक्षा के दौरान दो केंद्रों पर कुछ उम्मीदवारों द्वारा इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के माध्यम से नकल का प्रयास किया गया था। संबंधित अभ्यर्थियों को मौके पर पकड़ लिया गया और पूरी कोशिश वहीं नाकाम कर दी गई। उन्होंने कहा कि इसे पेपर लीक कहना तथ्यात्मक रूप से गलत है।

उन्होंने दावा किया कि दिल्ली में 10 वर्ष और पंजाब में सरकार बनने के बाद से अब तक एक भी पेपर लीक का मामला सामने नहीं आया, जबकि अन्य राज्यों में ऐसी घटनाएं लगातार हो रही हैं।

छात्र आंदोलनों का उल्लेख करते हुए केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्रवाई नहीं करने के आश्वासन के बावजूद विभिन्न राज्यों में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस ने बल प्रयोग किया और उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए।

पेपर लीक रोकने के लिए प्रस्तावित नए कानून पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि केवल सख्त कानून बना देने से समस्या खत्म नहीं होगी। उनके मुताबिक सबसे जरूरी निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और सरकार की राजनीतिक इच्छाशक्ति है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी किसी भी ऐसे कानून का समर्थन करेगी जो वास्तव में परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और सुरक्षित बनाए।