लुधियाना : नगर निगम लुधियाना में वर्षों से लंबित बैंक खातों की रिकंसिलिएशन (मिलान) प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही रिकॉर्ड रूम में हुई संदिग्ध छेड़छाड़ ने पूरे मामले को नई दिशा दे दी है। निगम के गलियारों में अब यह चर्चा तेज हो गई है कि कहीं यह केवल चोरी की घटना नहीं, बल्कि पुराने वित्तीय रिकॉर्ड और दस्तावेजों को प्रभावित करने की कोशिश तो नहीं थी। रिकॉर्ड रूम की घटना के बाद कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच हरियाणा में सामने आए चर्चित IDFCबैंक घोटाले जैसे पैटर्न की तुलना भी की जा रही है।
जानकारी के अनुसार नगर निगम कमिश्नर ओजस्वी अलंकार ने हाल ही में वर्षों से लंबित विभिन्न बैंक खातों, भुगतान वाउचर और वित्तीय अभिलेखों के मिलान के निर्देश दिए हैं। सूत्रों का कहना है कि इस प्रक्रिया के दौरान कई पुराने खातों, सरकारी योजनाओं के फंड और भुगतान रिकॉर्ड की दोबारा जांच की जा रही है। इसी बीच रिकॉर्ड रूम का पुराना ताला तोड़कर नया ताला लगाए जाने और महत्वपूर्ण फाइलों के कथित रूप से गायब होने की आशंका ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
नगर निगम के सूत्रों के अनुसार रिकॉर्ड रूम में अकाउंट्स शाखा के मूल वाउचर, बैंक रिकॉर्ड, भुगतान फाइलें और विभिन्न योजनाओं से जुड़े दस्तावेज सुरक्षित रखे जाते हैं। ऐसे में रिकॉर्ड रूम से छेड़छाड़ की घटना को सामान्य नहीं माना जा रहा। निगम के भीतर यह चर्चा है कि यदि सभी बैंक खातों और रिकॉर्ड का निष्पक्ष मिलान हुआ तो वर्षों पुराने वित्तीय लेन-देन की कई परतें खुल सकती हैं।
चर्चा यह भी है कि ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस (ओ एंड एम) सेल सहित कई विभागों के खर्च, आपातकालीन मदों में किए गए भुगतान तथा विभिन्न योजनाओं के तहत प्राप्त धनराशि के उपयोग की भी समीक्षा हो रही है। हालांकि इन चर्चाओं की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
एक्सपर्ट्स इसे हरियाणा में सामने आए चर्चित IDFC बैंक के 590 करोड़ के घोटाले जैसे पैटर्न की तुलना कर रहे है। हालांकि दोनों मामलों के बीच किसी प्रकार का आधिकारिक संबंध स्थापित नहीं किया गया है। फिर भी यह सवाल उठ रहा है कि क्या बैंक खातों की जांच शुरू होने और रिकॉर्ड रूम में हुई सेंध के बीच केवल संयोग है या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश छिपी है।
नगर निगम प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि पहले रिकॉर्ड का भौतिक सत्यापन और बैंक खातों का मिलान पूरा किया जाएगा। यदि जांच में किसी दस्तावेज की कमी, रिकॉर्ड से छेड़छाड़ या वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
ऐसा होता है तो चुनावी माहौल में मान सरकार को पिछली सरकारों के कार्यकाल में हुए वित्तीय घोटालों का एक और मुद्दा मिल जाएगा। जिसे कोई भी सरकार भुनाने का मौका हाथ से जाने नहीं देगी।