एयरपोर्ट रोड और पीआर-7 पर तेजी से बढ़े प्रोजेक्ट, लेकिन कब्जे में देरी, अधूरी सुविधाएं और रिफंड विवादों ने बढ़ाई चिंता। सुषमा ग्रुप, माया गार्डन समेत कई परियोजनाएं खरीदारों की शिकायतों और कानूनी मामलों को लेकर चर्चा में रहीं। विशेषज्ञों ने निवेश से पहले रेरा, मंजूर नक्शे और परियोजना की स्थिति जांचने की सलाह दी।

जीरकपुर: चंडीगढ़ से सटा जीरकपुर पिछले डेढ़ दशक में पंजाब का सबसे तेजी से उभरता रियल एस्टेट बाजार बन गया। एयरपोर्ट रोड, पीआर-7, वीआईपी रोड और अंबाला हाईवे के आसपास दर्जनों बड़े बिल्डरों ने आलीशान आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाएं शुरू कीं। आधुनिक जीवनशैली, बेहतर कनेक्टिविटी और अपेक्षाकृत कम कीमतों के कारण हजारों लोगों ने यहां अपने सपनों का घर और निवेश खरीदा।

लेकिन विकास की इस चमक के साथ एक दूसरा पक्ष भी सामने आया। कई परियोजनाओं में कब्जे में देरी, अधूरी सुविधाएं, रिफंड विवाद और निर्माण गुणवत्ता को लेकर खरीदारों की शिकायतें बढ़ती चली गईं। इन शिकायतों ने पंजाब रेरा, उपभोक्ता आयोग, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट और पुलिस तक का रास्ता तय किया।

सुषमा ग्रुप के प्रोजेक्ट सबसे ज्यादा चर्चा में

वर्ष 2026 में जीरकपुर का सबसे चर्चित मामला सुषमा ग्रुप की कुछ परियोजनाओं से जुड़ा रहा। सुषमा बेलेज़ा, सुषमा एम्पीरिया और सुषमा प्रिस्टीन में निवेश करने वाले कुछ खरीदारों ने आरोप लगाया कि उन्हें तय समय पर कब्जा नहीं मिला और कुछ मामलों में भुगतान या कमिटेड रिटर्न से जुड़े विवाद भी सामने आए। शिकायतों के आधार पर कंपनी के कुछ प्रमोटरों के खिलाफ दो एफआईआर दर्ज हुईं। पुलिस ने धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात सहित विभिन्न आरोपों की जांच शुरू की। कंपनी ने आरोपों से इनकार करते हुए अपना पक्ष कानूनी मंचों पर रखा है।

माया गार्डन के विवाद भी लंबे समय तक रहे सुर्खियों में

माया गार्डन की विभिन्न परियोजनाओं में रहने वाले निवासियों और खरीदारों ने अलग-अलग समय पर अधूरी सुविधाओं, कब्जे में देरी, कॉमन एरिया, पार्किंग, ट्रांसफार्मर और अन्य विकास कार्यों को लेकर आवाज उठाई। कुछ विवाद हाईकोर्ट तक पहुंचे, जबकि कई मामलों में उपभोक्ता आयोग और पंजाब रेरा ने सुनवाई की। अलग-अलग मामलों में खरीदारों को राहत भी मिली।

एटीएस और अन्य परियोजनाओं में भी शिकायतें

जीरकपुर की कुछ अन्य बड़ी परियोजनाओं में भी समय-समय पर खरीदारों ने मेंटेनेंस, मूलभूत सुविधाओं और वादे पूरे न होने के आरोप लगाए। कुछ मामलों में जिला उपभोक्ता आयोग ने खरीदारों के पक्ष में आदेश दिए। हालांकि इन परियोजनाओं में बड़ी संख्या में परिवार रह रहे हैं और सभी विवाद एक जैसे या समान प्रकृति के नहीं हैं।

बिजली, पार्किंग और कॉमन एरिया भी बने विवाद की वजह

सिर्फ कब्जा ही नहीं, बल्कि बिजली कनेक्शन, सीवरेज, पार्किंग, हरित क्षेत्र, क्लब हाउस और कॉमन एरिया जैसे मुद्दे भी कई सोसायटियों में विवाद का कारण बने। सुषमा वैलेंसिया में बिजली आपूर्ति का मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट तक पहुंचा, जबकि माया गार्डन में कॉमन एरिया और अन्य सुविधाओं को लेकर वर्षों से विवाद दर्ज हैं।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ
रियल एस्टेट विशेषज्ञों का कहना है कि खरीदारों को केवल विज्ञापनों के आधार पर निवेश नहीं करना चाहिए। परियोजना का रेरा पंजीकरण, स्वीकृत नक्शा, वित्तीय स्थिति, निर्माण की वास्तविक प्रगति और कब्जा प्रमाणपत्र की जांच जरूरी है। यदि किसी परियोजना में पहले से कानूनी विवाद चल रहे हों तो निवेश से पहले उनकी भी जानकारी लेनी चाहिए।