केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पेपर लीक रोकथाम कानून में संशोधन को मंजूरी दे दी है। प्रस्तावित बदलावों के तहत दोषियों के लिए अधिकतम 10 वर्ष की जेल और ₹10 करोड़ तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है। सरकार का कहना है कि कड़े कानून से प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता सुनिश्चित होगी, जबकि संशोधन विधेयक जल्द संसद में पेश किया जाएगा।

नई दिल्ली (Naren Danu) : प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक पर सख्ती बढ़ाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को पेपर लीक रोकथाम कानून (प्रिवेंशन ऑफ पेपर लीक एक्ट) में संशोधन को मंजूरी दे दी। नए प्रावधान लागू होने के बाद पेपर लीक के दोषियों को पहले से कहीं अधिक कड़ी सजा का सामना करना पड़ेगा।

सूत्रों के मुताबिक, संशोधन के तहत पेपर लीक में दोषी पाए जाने वालों के लिए अधिकतम 10 वर्ष की कैद और ₹10 करोड़ तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है। वहीं, न्यूनतम सजा को भी तीन वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष किए जाने का प्रस्ताव है, ताकि ऐसे अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि सरकार जल्द ही इस संशोधन विधेयक को संसद में पेश करेगी। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्रों के हितों से जुड़े इस कानून को प्राथमिकता देते हुए इसे बिना देरी संसद में लाने के निर्देश दिए हैं।

रिजिजू ने विपक्ष पर भी निशाना साधते हुए कहा कि यदि कांग्रेस इस विधेयक पर चर्चा में बाधा डालती है या संसद की कार्यवाही बाधित करती है, तो उसे देश के युवाओं के गुस्से का सामना करना पड़ेगा।

सरकार का मानना है कि संशोधित कानून लागू होने से प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता मजबूत होगी, संगठित पेपर लीक गिरोहों पर लगाम लगेगी और लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।