जीरकपुर (मेजर अली) : बलटाना के वार्ड नंबर-3 में खुले और टूटे ड्रेनेज के ढक्कन लोगों के लिए लगातार खतरा बने हुए हैं। नगर परिषद अधिकारियों ने एक सप्ताह पहले मौके का निरीक्षण कर अगले दिन समस्या का समाधान करवाने का भरोसा दिया था, लेकिन सात दिन बीतने के बाद भी न तो नए ढक्कन लगाए गए और न ही क्षतिग्रस्त सड़क की मरम्मत करवाई गई। इससे स्थानीय लोगों में नगर परिषद के प्रति रोष बढ़ता जा रहा है।
क्षेत्र में कई स्थानों पर ड्रेनेज के ढक्कन टूटे हुए हैं, जबकि कुछ जगहों पर ढक्कन पूरी तरह गायब हैं। सड़क के बीच बने गहरे गड्ढों में आए दिन दोपहिया और चारपहिया वाहनों के टायर फंस रहे हैं। रात के समय पर्याप्त रोशनी नहीं होने के कारण दुर्घटना का खतरा और बढ़ जाता है।
लोगों ने बताया कि बारिश के दौरान खुले ड्रेनेज पानी से भर जाते हैं और गड्ढे दिखाई नहीं देते। ऐसे में बच्चों, बुजुर्गों और पैदल चलने वाले लोगों के ड्रेनेज में गिरने की आशंका बनी रहती है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद नगर परिषद केवल आश्वासन देकर जिम्मेदारी से बच रही है।
कई बार शिकायत की, अधिकारी नहीं दे रहे ध्यान : नेगी
वार्ड नंबर-3 के पार्षद देवेंद्र सिंह नेगी ने कहा कि समस्या को लेकर नगर परिषद अधिकारियों को कई बार ई-मेल, फोन और लिखित शिकायतों के माध्यम से जानकारी दी जा चुकी है। इसके बावजूद मौके पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि खुले ड्रेनेज किसी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं और यदि कोई दुर्घटना होती है तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की होगी।
लोगों का दर्द
हर समय बच्चों की चिंता लगी रहती है
“गली में बच्चे खेलते रहते हैं। खुले ड्रेनेज के कारण हर समय डर बना रहता है कि कोई बच्चा इसमें न गिर जाए। शिकायत के बाद भी प्रशासन ने सुरक्षा के लिए बैरिकेड तक नहीं लगाए।”
— [स्थानीय महिला निवासी रेनू बाला ], वार्ड नंबर-3
रात को दिखाई नहीं देते गड्ढे
“रात के समय सड़क पर पर्याप्त रोशनी नहीं होती। खुले ड्रेनेज और टूटे ढक्कन दूर से दिखाई नहीं देते। कई दोपहिया वाहन चालक गिरते-गिरते बचे हैं।”
— [स्थानीय निवासी महेंद्र सिंह ], बलटाना
कार का टायर फंसने से हुआ नुकसान
“कुछ दिन पहले मेरी कार का टायर खुले ड्रेनेज में फंस गया था। वाहन निकालने के लिए लोगों की मदद लेनी पड़ी और कार की मरम्मत पर भी खर्च आया।”
— [वाहन चालक मुकेश कुमार ], वार्ड नंबर-3
बुजुर्गों का घर से निकलना मुश्किल
“सड़क पहले ही टूटी हुई है और अब जगह-जगह खुले ड्रेनेज भी हैं। बुजुर्गों और महिलाओं के लिए पैदल चलना मुश्किल हो गया है।”
— [ बबली रानी स्थानीय बुजुर्ग ], बलटाना
सिर्फ आश्वासन मिल रहे, काम नहीं हो रहा
“नगर परिषद को समस्या की पूरी जानकारी है। अधिकारी हर बार जल्द कार्रवाई की बात करते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं होता।”
— देवेंद्र सिंह नेगी, पार्षद वार्ड नंबर-3
जल्द मौके पर भेजेंगे अधिकारी
“यह मामला पत्रकारों के माध्यम से मेरे संज्ञान में आया है। संबंधित अधिकारियों को मौके पर भेजकर टूटे ढक्कन बदलवाने और समस्या का जल्द समाधान करवाने के निर्देश दिए जाएंगे।”
— गुरप्रीत सिंह विर्क, अध्यक्ष नगर परिषद जीरकपुर
वादा एक दिन का, इंतजार सात दिन का
नगर परिषद के जेई सवनीत सिंह ने पिछले सप्ताह कहा था कि अगले दिन मौके का जायजा लेकर टूटे ड्रेनेज के ढक्कनों को ठीक करवा दिया जाएगा। इसके बावजूद एक सप्ताह बाद भी स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया। टूटे ढक्कन और सड़क के गड्ढे नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
क्षेत्रवासियों ने मांग की कि खुले ड्रेनेज पर तत्काल मजबूत ढक्कन लगाए जाएं, खतरनाक स्थानों पर बैरिकेडिंग की जाए और टूटी सड़कों की मरम्मत करवाई जाए। लोगों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे नगर परिषद कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करेंगे।