चंडीगढ़ (अजीत झा.) : जीएमसीएच-32 के ई-ब्लॉक की छत से छलांग लगाकर जान गंवाने वाले 23 वर्षीय एमबीबीएस चौथे वर्ष के छात्र डॉ. करण संधू की मौत की गुत्थी सुलझाने में अब पुलिस की सबसे बड़ी उम्मीद डिजिटल साक्ष्य बन गए हैं। शुरुआती जांच में सामने आए तथ्यों के बाद पुलिस ने अब करण के मोबाइल फोन, व्हाट्सएप चैट, कॉल रिकॉर्ड, सोशल मीडिया गतिविधियों और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डेटा की गहन जांच शुरू कर दी है। जांच अधिकारियों का मानना है कि इन साक्ष्यों से घटना से पहले करण की मानसिक स्थिति और उसके अंतिम घंटों की गतिविधियों का स्पष्ट पता चल सकता है।
पुलिस जांच में सामने आया है कि घटना से कुछ समय पहले करण ने अपने पांच करीबी दोस्तों को व्हाट्सएप पर अलग-अलग संदेश भेजे थे। इनमें से एक संदेश ने जांच एजेंसियों का विशेष ध्यान खींचा है। उसने अपने एक मित्र को लिखा था, “यहां बहुत तनाव है… बाहर चला जाता तो बेहतर रहता… अब और सहन नहीं हो रहा।” पुलिस इन संदेशों की टाइमलाइन, उनके जवाब और बातचीत के पूरे क्रम का विश्लेषण कर रही है ताकि यह समझा जा सके कि आखिर किन परिस्थितियों में करण इस मानसिक स्थिति तक पहुंचा।
जांच में यह भी सामने आया कि घटना से एक दिन पहले तक करण सामान्य व्यवहार कर रहा था। उसने अपने एक दोस्त से फीफा वर्ल्ड कप को लेकर सामान्य बातचीत भी की थी। ऐसे में पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आखिर 24 घंटे के भीतर ऐसा क्या हुआ, जिससे उसकी मानसिक स्थिति में बदलाव आया। जांच अधिकारी उसके करीबी दोस्तों, सहपाठियों और परिचितों से भी लगातार पूछताछ कर रहे हैं।
इस बीच, पुलिस पहले ही यह पुष्टि कर चुकी है कि करण घर से लाइब्रेरी जाने की बात कहकर निकला था, लेकिन वहां नहीं पहुंचा। सीसीटीवी फुटेज के अनुसार वह सीधे जीएमसीएच-32 के ई-ब्लॉक पहुंचा। पुलिस को छत से उसका बैग, जूते, कोल्ड ड्रिंक और चॉकलेट भी बरामद हुई थी। बैग से मिले एक नए रजिस्टर के पहले पन्ने पर अंग्रेजी में लिखा एक भावनात्मक संदेश भी जांच का अहम हिस्सा बना हुआ है। उस लिखावट को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है ताकि यह पुष्टि हो सके कि वह नोट करण ने ही लिखा था।
वीरवार सुबह पोस्टमार्टम के बाद करण का शव परिजनों को सौंप दिया गया। विदेश में रह रहे परिवार के सदस्य भी चंडीगढ़ पहुंच चुके हैं। अस्पताल और घर दोनों जगह गम का माहौल है।
मामले की जांच कर रहीं डीएसपी गुरजीत कौर ने बताया कि पुलिस किसी भी संभावना को नजरअंदाज नहीं कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक रिपोर्ट, मोबाइल फोन से प्राप्त डिजिटल डेटा और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद ही मौत के कारणों और पूरे घटनाक्रम को लेकर स्पष्ट निष्कर्ष निकाला जाएगा। फिलहाल जांच सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर आगे बढ़ाई जा रही है।