संयुक्त कार्रवाई समिति ने लीगल एड डिफेंस काउंसिल व्यवस्था के क्रियान्वयन पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इससे प्रैक्टिस कर रहे अधिवक्ताओं के हित प्रभावित हो सकते हैं। चंडीगढ़ प्रेस क्लब में हुई प्रेस वार्ता में बार एसोसिएशनों ने नीति की समीक्षा और निर्णय से पहले प्रतिनिधियों से बातचीत की मांग रखी। समिति ने समाधान नहीं होने तक लोकतांत्रिक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी।

चंडीगढ़: पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ की बार एसोसिएशनों की संयुक्त कार्रवाई समिति (जॉइंट एक्शन कमेटी) ने गुरुवार को लीगल एड डिफेंस काउंसिल (एलएडीसी) प्रणाली के क्रियान्वयन का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि इससे प्रैक्टिस कर रहे अधिवक्ताओं के हितों तथा वर्तमान कानूनी सहायता व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

चंडीगढ़ प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ की विभिन्न बार एसोसिएशनों के अध्यक्षों और सचिवों ने एलएडीसी योजना के संचालन पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से इस नीति की तत्काल समीक्षा करने तथा आगे कोई भी निर्णय लेने से पहले बार एसोसिएशनों के प्रतिनिधियों से विस्तृत विचार-विमर्श करने की मांग की।

पदाधिकारियों ने कहा कि वे जरूरतमंद और पात्र लोगों को गुणवत्तापूर्ण कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के पूर्णतः पक्षधर हैं, लेकिन इसके लिए अपनाई जाने वाली किसी भी व्यवस्था में अधिवक्ताओं के हितों की रक्षा के साथ-साथ पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जानी चाहिए।

संयुक्त कार्रवाई समिति ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों और चिंताओं का उचित समाधान नहीं किया जाता, तब तक उनका लोकतांत्रिक आंदोलन जारी रहेगा। समिति ने न्यायपालिका और सरकार से बार प्रतिनिधियों के साथ सार्थक संवाद शुरू करने की भी अपील की।

इस अवसर पर नाभा बार एसोसिएशन के ज्ञान सिंह मुंगो सहित पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ की विभिन्न बार एसोसिएशनों के अध्यक्ष और सचिव उपस्थित रहे। सभी ने अधिवक्ताओं के हितों की रक्षा करते हुए प्रत्येक जरूरतमंद व्यक्ति को न्याय तक समान पहुंच सुनिश्चित करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।