लुधियाना: लुधियाना के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (MSME) को पर्यावरण के अनुकूल और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के उद्देश्य से एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में उद्योगों को जलवायु परिवर्तन (Climate Change), सतत विकास (Sustainability) और ग्रीन फाइनेंस जैसे महत्वपूर्ण विषयों की सरल एवं व्यावहारिक जानकारी दी गई।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को बताया गया कि छोटे-छोटे बदलाव अपनाकर वे अपनी उत्पादन लागत कम कर सकते हैं और साथ ही पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दे सकते हैं। फाउंडेशन फॉर एमएसएमई क्लस्टर्स (FMC) की फील्ड टीम ने देशभर के विभिन्न एमएसएमई क्लस्टरों में काम करने के अपने अनुभव साझा किए और स्थानीय उद्योगों को व्यवहारिक समाधान सुझाए।
कार्यक्रम में उद्योगों को कम लागत वाले ऐसे उपायों से भी अवगत कराया गया, जिनसे ऊर्जा की बचत, संसाधनों का बेहतर उपयोग और व्यवसाय की दीर्घकालिक वृद्धि सुनिश्चित की जा सके। प्रशिक्षण के अंत में प्रतिभागियों से सुझाव लिए गए तथा निटवेयर क्लब के महासचिव नरेंद्र मिगलानी ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
एफएमसी के मुख्य परिचालन अधिकारी (Chief Operating Officer) अमित पांडे ने कहा कि एमएसएमई भारत की विनिर्माण अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और देश के जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने में उनकी अहम भूमिका है। उन्होंने कहा कि संस्था का उद्देश्य जलवायु कार्रवाई और ग्रीन फाइनेंस को छोटे एवं मध्यम उद्योगों के लिए सरल और सुलभ बनाना है, ताकि सतत विकास उद्योगों के लिए अतिरिक्त बोझ नहीं बल्कि प्रतिस्पर्धात्मक लाभ साबित हो। उन्होंने विश्वास जताया कि इस पहल से लुधियाना के उद्योग हरित तकनीकों को अपनाने, आवश्यक ज्ञान प्राप्त करने और वित्तीय सहायता तक पहुंच बनाने में सक्षम होंगे।
एफएमसी ने बताया कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम देशभर के एमएसएमई क्लस्टरों के साथ उसके निरंतर प्रयासों का हिस्सा है। संस्था उद्योगों को जागरूकता, तकनीकी कौशल और वित्तीय संसाधनों तक पहुंच उपलब्ध कराकर उन्हें सतत विकास की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए कार्य कर रही है।
वर्ष 2005 में स्थापित फाउंडेशन फॉर एमएसएमई क्लस्टर्स (FMC) देश की अग्रणी गैर-लाभकारी संस्था है। यह 300 से अधिक एमएसएमई क्लस्टरों में एक लाख से अधिक कारीगरों और औद्योगिक इकाइयों के साथ कार्य कर रही है। संस्था MSME मंत्रालय और ग्रामीण विकास मंत्रालय की मान्यता प्राप्त नोडल एजेंसी है तथा SIDBI, KVIC, NABARD, UNIDO, UNDP, EU, ADB सहित कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के सहयोग से उद्योग एवं पर्यावरण से जुड़े अनेक प्रोजेक्ट संचालित कर रही है।