जीरकपुर: ट्राइसिटी के रियल एस्टेट बाजार में एक समय भरोसे का नाम रहे सुषमा ग्रुप के कई आवासीय और व्यावसायिक प्रोजेक्ट अब विवादों के केंद्र में हैं। फ्लैट और कमर्शियल यूनिट बुक कराने वाले खरीदार लंबे समय से कब्जा मिलने का इंतजार कर रहे हैं। कई निवेशकों का आरोप है कि तय समय पर न तो प्रोजेक्ट पूरे हुए और न ही जमा धनराशि वापस की गई। इसके चलते खरीदार लगातार विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं और कई मामलों में पुलिस और उपभोक्ता आयोग का दरवाजा भी खटखटा चुके हैं।
विवादों में जिन प्रमुख परियोजनाओं के नाम सामने आए हैं, उनमें सुषमा बेलेज़ा, सुषमा एम्पीरिया, सुषमा प्रिस्टीन और पहले से विवादों में रही सुषमा क्रिसेंट शामिल हैं। खरीदारों का आरोप है कि निर्माण कार्य वर्षों से धीमा या ठप है, जबकि अधिकांश ने परियोजनाओं में बड़ी रकम निवेश कर रखी है।
मई 2026 में जीरकपुर थाना पुलिस ने सुषमा ग्रुप के प्रमोटरों बिंदुपाल मित्तल, भारत मित्तल और प्रतीक मित्तल सहित अन्य के खिलाफ दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज कीं। एक मामले में सेवानिवृत्त मेजर जनरल ने आरोप लगाया कि एक करोड़ रुपये से अधिक का फ्लैट बुक कराने और लगभग पूरी राशि जमा करने के बावजूद तय समय पर कब्जा नहीं मिला और न ही धन वापस किया गया। दूसरे मामले में निवेशकों ने एम्पीरिया और प्रिस्टीन परियोजनाओं में निवेश के बाद कब्जा और वादा किए गए 'कमिटेड रिटर्न' बंद होने का आरोप लगाया। पुलिस ने धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और साजिश जैसी धाराओं में जांच शुरू की है।
खरीदारों का कहना है कि वे कई बार कंपनी कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन कर चुके हैं। उनका आरोप है कि महीनों तक आश्वासन दिए गए, लेकिन न तो निर्माण में अपेक्षित तेजी आई और न ही भुगतान लौटाया गया। सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर भी निवेशकों ने अपनी नाराजगी जताई है। कई रिपोर्टों में सैकड़ों निवेशकों के प्रभावित होने का दावा किया गया है, हालांकि इसकी आधिकारिक संख्या अभी जारी नहीं की गई है।
इधर, जून 2026 में चंडीगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक मामले में सुषमा बिल्डटेक को खरीदार की जमा राशि लगभग 10.05 लाख रुपये ब्याज सहित लौटाने के साथ मानसिक प्रताड़ना और मुकदमेबाजी खर्च का भुगतान करने का आदेश दिया। आयोग ने माना कि तय समय पर कब्जा नहीं दिया गया और दस्तावेजों से सिद्ध भुगतान की वापसी का निर्देश दिया।
रियल एस्टेट विशेषज्ञों का कहना है कि इन मामलों का असर केवल एक बिल्डर तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे ट्राइसिटी के रियल एस्टेट बाजार में खरीदारों का भरोसा भी प्रभावित हो रहा है। वहीं, सुषमा ग्रुप ने विभिन्न कानूनी कार्यवाहियों में आरोपों से इनकार करते हुए अपना पक्ष रखा है और मामले न्यायिक व जांच प्रक्रिया के अधीन हैं।